नजारा
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एक तरफ दान पुण्य
एक तरफ पीते खून
गरीब बेचारे पिसते
रोटी नसीब दो जून,
कोई सेवाभाव रखता
कोई चुरा रहा आंखें
गरीबों का खा खाकर
कोई मार रहा डाके,
कहीं बेईमानी शोर है
कहीं तम घोर छाया
एक दूसरे को मार रहे
घोर कलियुग है आया,
इंतजार कर रहे लोग
आएगा जरूर सतयुग
आओ मिलके एक हो
आह्वान करता नवयुग।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
महंगाई
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हर चीज महंगी हुई
कमर तोड़ती महंगाई
कई दिन बीत गए हैं
फल, सब्जी ना खाई,
पांच रुपये एक केला
आलू 30 रुपये किलो
सूखी रोटी खा रहे हैं
चूल्हे पर नहीं पतीलो,
आटा व सूजी महंगी
महंगा दूध व देसी घी
मुश्किल से छाछ मिले
दूध समझकर उसे पी,
नमकीन,बिस्कुट गायब
महंगा हो गया कपड़ा
लॉकडाउन से परेशान
चहुं ओर बड़ा लफड़ा।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
ताई ताऊ संवाद
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ताई बोली ताऊ से.....
बेलन अपना टूट गया
चकला काम नहीं देता
रोटी बेलना कठिन है
रास्ता सुझाई रहे देता।
ताऊ बोला ताई से.....
लाकॅडाउन चल रहा है
दुकानें हैं सभी ही बंद
चकला बेलन ना मिले
मन में चलती रहे द्वंद्व,
थाली को चकला बनाके
हाथ से बधा लो चपाती
कठिन स्थिति जब आए
यह ट्रिक काम ही आती।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
पानी फेरा
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रामू ने मुश्किल से एक एकड़ जमीन बटाई में लेकर सरसों उगाई थी। बीज, खाद, पानी तथा देखरेख करते जब फसल पकान पर पहुंची तो ओलावृष्टि ने मेहनत पर पानी फेर दिया। इतना ही नहीं जब बची खुची फसल पैदावार लेने का मन बनाया तो बारिश हो गई। खाते में ही फसल बर्बाद हो गई। एक ओर जमींदार की रकम अदा करनी थी वहीं खाद,बीज,पानी की रकम अदा करनी थी। पैदावार लेकर जब मंडी पहुंचा तो उनकी सरसों की कीमत महज इतनी ही हुई जितना की जमींदार एवं खाद बीज का खर्चा था। परिवार फिर भूखों था। बेचारा रामू प्रभु की माया को बार बार सोचकर कभी हंसता तो कभी रो रहा था।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**



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