वीर धीर
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जो दूसरों को जीवन देता
वो देव पुरुष कहलाता है
कोरोना से लड़ते रहते वो
वो वीर योद्धा कहाता है,
रात दिन सेवा में जुट रहे
चो सच्चे वीर भारत के हैं
सरकार और जनता दोनों
पहिये एक ही रथ के हैं,
लॉकडाउन के नियम बने
धीर-वीर करते हैं पालन
नियमों में जो नहीं बंधता
रास्ता अपनाए ज्यों रावण,
उन भक्तों को नमन करो
दिनरात जग की करे सेवा
ईश्वर से बस करो प्रार्थना
उनको मिले मनचाही मेवा।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
लघुकथा खाना
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एक अधेड़ साधुवेश धारी ने घर के दरवाजे पर दस्तक दी और कहा-बेटा, दो दिन से भूखा हूं। कुछ भी नहीं खाया है। कुछ मिलेगा?
घर से एक महिला आई और कहा-जरूर मिलेगा। घर के अंदर आओ और गर्मागर्म खाना खाओ। साधुवेशधारी ने कहा-मुझे तो पैसे दे दो।
महिला ने जवाब दिया-एक तरफ तो तुम अपने को भूखा बता रहे हो और दूसरी ओर खाना देते हैं तो पैसे मांगते हो। तुम्हें पेट की भूख नहीं है अपितु पैसों की भूख है। साधुवेशधारी ने अपनी दाल न गलती देख आगे बढ़ गया।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
ताऊ ताई संवाद
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ताई बोली ताऊ से.....
चलो उनको याद करे
जो देते देश को सेवा
निज तन करके अर्पण
नहीं चाहते कोई मेवा।
ताऊ बोला ताई से.......
सच्चे सितारे सच्चे मोती
सच्चे कहलाते वो हीरे
धन दौलत मोह नहीं है
तन मन अर्पित धीरे धीरे,
एक दिन वो भी आएगा
इनको मानेंगे सच्चे मोती
ये आंखों के तारे कहाए
कहलाएंगे जगत ज्योति।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
स्वच्छ
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दो पौधे कर रहे बातें
खुशी खुशी कटे रातें
प्रदूषण खत्म हो गया
अब फूल खिल जाते,
शुद्ध वातावरण बना
आनंद आया है घना
शांत होकर अब रहो
शोर करना अब मना,
दुर्घटनाएं घटती जाए
न सभा ना कहीं शोर
प्रसन्न हैं बुजुर्ग घर में
जंगल में नाच रहे मोर,
आ गया मजा अब तो
लॉकडाउन का उपहार
संतों जैसा हुआ जीवन
बेशक घटा है व्यापार।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
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जो दूसरों को जीवन देता
वो देव पुरुष कहलाता है
कोरोना से लड़ते रहते वो
वो वीर योद्धा कहाता है,
रात दिन सेवा में जुट रहे
चो सच्चे वीर भारत के हैं
सरकार और जनता दोनों
पहिये एक ही रथ के हैं,
लॉकडाउन के नियम बने
धीर-वीर करते हैं पालन
नियमों में जो नहीं बंधता
रास्ता अपनाए ज्यों रावण,
उन भक्तों को नमन करो
दिनरात जग की करे सेवा
ईश्वर से बस करो प्रार्थना
उनको मिले मनचाही मेवा।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
लघुकथा खाना
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एक अधेड़ साधुवेश धारी ने घर के दरवाजे पर दस्तक दी और कहा-बेटा, दो दिन से भूखा हूं। कुछ भी नहीं खाया है। कुछ मिलेगा?
घर से एक महिला आई और कहा-जरूर मिलेगा। घर के अंदर आओ और गर्मागर्म खाना खाओ। साधुवेशधारी ने कहा-मुझे तो पैसे दे दो।
महिला ने जवाब दिया-एक तरफ तो तुम अपने को भूखा बता रहे हो और दूसरी ओर खाना देते हैं तो पैसे मांगते हो। तुम्हें पेट की भूख नहीं है अपितु पैसों की भूख है। साधुवेशधारी ने अपनी दाल न गलती देख आगे बढ़ गया।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
ताऊ ताई संवाद
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ताई बोली ताऊ से.....
चलो उनको याद करे
जो देते देश को सेवा
निज तन करके अर्पण
नहीं चाहते कोई मेवा।
ताऊ बोला ताई से.......
सच्चे सितारे सच्चे मोती
सच्चे कहलाते वो हीरे
धन दौलत मोह नहीं है
तन मन अर्पित धीरे धीरे,
एक दिन वो भी आएगा
इनको मानेंगे सच्चे मोती
ये आंखों के तारे कहाए
कहलाएंगे जगत ज्योति।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
स्वच्छ
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दो पौधे कर रहे बातें
खुशी खुशी कटे रातें
प्रदूषण खत्म हो गया
अब फूल खिल जाते,
शुद्ध वातावरण बना
आनंद आया है घना
शांत होकर अब रहो
शोर करना अब मना,
दुर्घटनाएं घटती जाए
न सभा ना कहीं शोर
प्रसन्न हैं बुजुर्ग घर में
जंगल में नाच रहे मोर,
आ गया मजा अब तो
लॉकडाउन का उपहार
संतों जैसा हुआ जीवन
बेशक घटा है व्यापार।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**

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