Friday, April 17, 2020

ताऊ ताई संवाद
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ताई बोली ताऊ से........
बीमारी नहीं मिटी जग से
लो दुआ  करे अब रब से
जल्दी से बीमारी मिटा दो
कुछ बोल ना पाए लब से।
ताऊ बोला ताई से............
हद कर दी है इस बीमारी
पर न हारी सरकार हमारी
मिलकर रोग को भगाना है
घर में बैठकर करो तैयारी,
एक आवाज पर चलना है
हिम्मत ये जन नहीं हारेंगे
माना घातक बहुत बीमारी
हारेगी ये कोरोना महामारी।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**


 बिगाड़ा हाल 

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खान पान दूषित हो गया
और बिगड़ी है जन चाल
फास्ट फूड पसंद इतना है
जिसने बिगाड़ दिया हाल,
मीट मांस दिनभर खाते हैं
भूल गए भोजन शाकाहार
चाऊमीन,बर्गर,तेज मसाले
बस इनसे अधिक है प्यार,
चाट पकौड़ा, पानी बतासा
उस पर पीते है चाय शराब
मरियल कांचल शरीर हुए
चेहरों की उड़  चुकी आब,
दूध,दही का खाना होता है
पी लो राबड़ी और देशी घी
दही, छाछ, जूस और म_ा
खूब चाव और  मजे से पी।
-होशियार सिंह यादव
पता -मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
     कनीना-123027
जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400




महामारी 

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भारत ने हिम्मत नहीं हारी
बेशक फैली खूब बीमारी
जिसने दुष्ट हरकत कर दी
उसे कभी ना नमन हमारी,
एक एक भारतवासी लड़ा
सहायता खातिर आगे बढ़ा
जन पर जिसने किया प्रहार
उसने अपना खोदा है कढ़ा,
बेशक जाति पाती अलग हैं
मिलकर लड़ते महामारी से
वीर बहादुर मैदान में डटे हैं
पार उतारेंगे  इस बीमारी से,
कभी हिम्मत नहीं कारा करे
जिसके मन में इच्छा फौलाद
जो जन बीमारी  से लड़ रहा
याद करेगा उसको ये जहान।
-होशियार सिंह यादव
पता -मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
     कनीना-123027
जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा


  महामारी

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पिता अपने पुत्र को ज्ञान की बातें समझा रहे थे कि तभी उन्हें खांसी आने लगी। चारपाई पर लिटा दिया। अभी दो घंटे बीते थे कि सर्दी और जुकाम का रोग लग गया। पुत्र राजन अति परेशान हुआ। अभी उसकी उम्र कम थी किंतु उसने झटपट अस्पताल में संपर्क किया। लॉकडाउन का समय होने के कारण घर से बाहर निकलना भी कठिन था। एंबुलेंस घर द्वारे आई और राजन के पिता अमृत को अस्पताल ले गई। राजन भी अस्पताल पहुंचा। डाक्टर अब कोरोना की बीमारी के कयास लगा रहे थे।सैंपल भेजे गए। तब तक दवा चलती रही किंतु राजन को अपने पिता से दूर रखा गया। तीन दिनों में रिपोर्ट आई और भगदड़ मच गई। अमृत कोरोना पीडि़त था। अब तो राजन की आंखों में आंसू आ गए। उनके पिता की उम्र अधिक होने के कारण जीवन को भी खतरा बन गया। दस दिनों तक इलाज चला किंतु अमृत की हालात बदतर होती चली गई। एक शाम को राजन अपने पिता को दूर बैठा निहार रहा था कि अमृत ने एक बार राजन को इशारा किया और चल बसा।
चारों ओर सन्नाटा छा गया। राजन रो रोकर बुरा हाल कर बैठा। अमृत का अंतिम संस्कार अस्पताल के कर्मियों ने ही किया जिसमें अमृत एवं उसके घर के किसी जन को पास नहीं आने दिया। इतनी घटिया मौत पर लोग स्तब्ध थे। दिन रात प्रभु भक्ति में बीताने वाला जन ऐसी बुरी मौत मरेगा, कभी सोचा ही नही था?
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**



 






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