जीत
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हार अगर हाथ लगे
बन जाएगी वो जीत
हार नहीं दुश्मन हो
जीत सदा नहीं मीत,
बार बार झुकाए तो
हार भी झुक जाती
बार बार बुलाएं तो
जीत चल द्वारे आती,
कोरोना को हराते रहे
जरूर वो हार जाएगा
सारा जग प्रसन्न होगा
नव प्रभात छा जाएगा,
सदा आगे बढ़ते जाना
रुक गए अंत हो जाए
तन मन धन सेवा करे
प्रदेश आसमां छू जाए।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना
महेंद्रगढ़,हरियाणा
मोबाइल 09416348400
बैसाखी
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13 अप्रैल वर्ष 1919
रोलेट भारत में आया
बैसाखी का दिन था
सैकड़ों ने प्राण गंवाया,
जनरल डायर नीच ने
लोगों पर गोली चलाई
शांति से बैठे लोगों ने
गोला खाके जान गंवाई,
शर्मनाक था वह दिन
लिखा यही कैमरान ने
एलिजाबेथ भी रोई थी
आजादी बीज बोई थी,
उद्यमसिंह ने बदला ले
ऋण चुकता कर डाला
जनरल डायर को मार
फांसी की पहनी माला।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
ताऊ ताई संवाद
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ताई बोली ताऊ से.....
बैसाखी को याद कर
आंखें हो जाती हैं नम
जलियांवाला बाग सुन
दिल से होता बड़ा गम।
ताऊ बोला ताई से.......
रोलेट एक्ट भारत आना
लेकर आया मौत पैगाम
379 लोग मारे गए जब
डायर का था नीच काम,
नमन करो उन वीरों को
जिन्होंने दी यह कुर्बानी
इतिहास में सदा अमर है
जनरल डायर की मनमानी।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
लघु कथा मयखाना
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(इस लघुकथा के पात्र एवं घटना चित्रण काल्पनिक है,किसी सजीव या निर्जीव से मिलना या घटना किसी पर सटीक बैठना महज संयोग कहा जाएगा)
कहने को तो शेल्टर होम था किंतु महज चंद लोग यहां ठहरे हुए थे। किंतु इनकी आड़ में अधिकारी और कर्मचारी शराब में झूमते देखे जा सकते थे। और तो और अधिकारियों के लिए खाना यहां से जाता था। शेल्टर होम में ठहरे लोग भी मदिरा का मजा लेते। कहने को ठेके बंद थे किंतु ठेके खुलवाकर शराब की सप्लाई होती। एक दिन उच्चाधिकारी को शिकायत मिली तो अचानक छापा मारकर हकीकत का पता लगाया। जो भी सुनता बस थू थू करता। शेल्टर संचालक की भी किरकिरी हुई। जो भी सुनता बस कहता-यह कोई शेल्टर होम नहीं यह तो मयखाना है, मयखाना।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
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हार अगर हाथ लगे
बन जाएगी वो जीत
हार नहीं दुश्मन हो
जीत सदा नहीं मीत,
बार बार झुकाए तो
हार भी झुक जाती
बार बार बुलाएं तो
जीत चल द्वारे आती,
कोरोना को हराते रहे
जरूर वो हार जाएगा
सारा जग प्रसन्न होगा
नव प्रभात छा जाएगा,
सदा आगे बढ़ते जाना
रुक गए अंत हो जाए
तन मन धन सेवा करे
प्रदेश आसमां छू जाए।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना
महेंद्रगढ़,हरियाणा
मोबाइल 09416348400
बैसाखी
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13 अप्रैल वर्ष 1919
रोलेट भारत में आया
बैसाखी का दिन था
सैकड़ों ने प्राण गंवाया,
जनरल डायर नीच ने
लोगों पर गोली चलाई
शांति से बैठे लोगों ने
गोला खाके जान गंवाई,
शर्मनाक था वह दिन
लिखा यही कैमरान ने
एलिजाबेथ भी रोई थी
आजादी बीज बोई थी,
उद्यमसिंह ने बदला ले
ऋण चुकता कर डाला
जनरल डायर को मार
फांसी की पहनी माला।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
ताऊ ताई संवाद
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ताई बोली ताऊ से.....
बैसाखी को याद कर
आंखें हो जाती हैं नम
जलियांवाला बाग सुन
दिल से होता बड़ा गम।
ताऊ बोला ताई से.......
रोलेट एक्ट भारत आना
लेकर आया मौत पैगाम
379 लोग मारे गए जब
डायर का था नीच काम,
नमन करो उन वीरों को
जिन्होंने दी यह कुर्बानी
इतिहास में सदा अमर है
जनरल डायर की मनमानी।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
लघु कथा मयखाना
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(इस लघुकथा के पात्र एवं घटना चित्रण काल्पनिक है,किसी सजीव या निर्जीव से मिलना या घटना किसी पर सटीक बैठना महज संयोग कहा जाएगा)
कहने को तो शेल्टर होम था किंतु महज चंद लोग यहां ठहरे हुए थे। किंतु इनकी आड़ में अधिकारी और कर्मचारी शराब में झूमते देखे जा सकते थे। और तो और अधिकारियों के लिए खाना यहां से जाता था। शेल्टर होम में ठहरे लोग भी मदिरा का मजा लेते। कहने को ठेके बंद थे किंतु ठेके खुलवाकर शराब की सप्लाई होती। एक दिन उच्चाधिकारी को शिकायत मिली तो अचानक छापा मारकर हकीकत का पता लगाया। जो भी सुनता बस थू थू करता। शेल्टर संचालक की भी किरकिरी हुई। जो भी सुनता बस कहता-यह कोई शेल्टर होम नहीं यह तो मयखाना है, मयखाना।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**


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