जब कुछ ना मिले
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विधा-कविता
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जब कुछ ना मिले परिणाम, हिम्मत से लो काम,
हिम्मत जिसके दिल में हो,मिले जरूर परिणाम।
हाथ पर हाथ बांधकर रखे, आलसी उसे मानते,
जानकर भी काम नहीं करे, वो होता है अज्ञान।।
जब कुछ नहीं मिले धन, नहीं बन जाता निर्धन,
एक दिन धन की आवक हो, तत्पर हो तन मन।
पतझड़ जब बीत जाता है,आता है बसंत उपवन,
जैसे विष्णु पूजा खातिर, माह आता है अगहन।।
जब कुछ नहीं मिले सम्मान,मानों नहीं अपमान,
काम सदा करते रहो तो, एक दिन मिले सम्मान।
निरंतर पथ पर चलना ही, सफलता का द्योतक,
नाम मिलेगा जरूर एक दिन, रहना नहीं अज्ञान।
जब कुछ नहीं मिले सार,नहीं कहे उसे निस्सार,
बहुत थका जब इंसान हो, छाया से होगा प्यार।
धूप में चलते जो जाते,कठिन डगर मंजिल पाते,
मन में शंका बस जाये,होती निस दिन जन हार।।
जब कुछ नहीं होती आश, जन मिलता निराश,
निराशा के चलते ही जन, हो जाता वो हताश।
अंतिम समय तक लड़ते रहो, करना है प्रयास,
काम बने या नहीं बने, पर रहो कभी न उदास।।
जब सब कुछ खो जाये,अंतिम मंजिल वो पाये,
चाहे शाम अंतिम हो, पर चेहरा सदा मुस्कराये।
हँसता चेहरा देखकर,जन भी चकित हो जाएंगे,
बस अपनी यादों को, अपने ही दिल में बसाये।।
जब दाव जन फेल हो जाये,निराशा हाथ आये,
निराशा आशा बन जाये, बस आगे बढ़ते जाये।
जग में हिम्मत नहीं हारते,वो ही पाते हैं मंजिल,
इंसानियत वहीं होती है, जो गिरते को उठाये।।
जब कुछ नहीं मिले हाथ, देता सदा प्रभु साथ,
मंजिल को पा लेगा, बढ़ाता कोई अपने हाथ।
भागीरथी प्रयास करो, गंगा धरा पर आ जाये,
समय बदले देर न लगे, बदल जायेंगे हालात।।
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स्वरचित/नितांत मौलिक
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* डा. होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
फोन 09416348400
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दोहा मुक्तक
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विषय- दया/करूणा
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दया धर्म का मूल है, कहते आये लोग।
पाप कर्म इंसान में, पैदा हो ज्यों रोग।।
धरती रोती आज यूूँ, कौन बचाये लाज,
कलियुग में बढ़ता बड़ा, दुष्कर्मों का भोग।।
नहीं दया दिल में रही, बुरे कर्म से प्रीत।
अहित करे जन खूब ही,गाते हरदम गीत।।
ओछे धंधे बढ़ रहे, नहीं किसी की खैर,
परहित में जो जी रहे, कहते उसको मीत।।
दिल में मिलती जब दया, करता सुंदर काम।
धर्म पुण्य के बल सदा, होता जग में नाम।।
पाप कर्म इंसान के, होते नरक समान,
जनहित में जो लीन हो, मन मंदिर सम धाम।।
जाना है संसार से, दया रहम दिल राख।
अच्छे कर्मों से बने, सुंदर जन की शाख।।
आपस में जो बांटते, प्रेम प्रीत जग प्यार,
भूल नहीं इस जगत में, बनती मरके राख।।
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*डा. होशियार सिंह यादव,
कनीना, जिला महेंद्रगढ़,
हरियाणा
फोन 09416348400


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