शकुन
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विधा-कविता
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सुंदर जग की बात चले,
जन मिलते शकुन हजार,
बस जग में यूं बढ़ता रहे,
जन जन में ही एक प्यार।
जब मात पिता साथ दे,
शकुन दिल को मिलता,
आशीर्वाद सिर पर सदा,
लंबी उम्र का ही खिलता।
दोस्त मिले वर्षों के बाद,
आती थी जिनकी यूं याद,
शकुन जहां के मिल जाये,
प्रभु से करते हम फरियाद।
धन दौलत सुख मिल जाये,
भाई बांधवों का मिले प्यार,
शकुन जहां के मिल जाएंगे,
दिल गदगद हो हजार बार।
लंबी उम्र जीकर जगत से,
बड़े शान से रुखसत होते,
शकुन हर इंसान मिलता,
याद में उनकी कितने रोते।।
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स्वरचित/नितांत मौलिक
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होशियार सिंह यादव
कनीना, वार्ड नंबर 01,
मोहल्ला-मोदीका
जिला-महेंद्रगढ़ हरियाणा
फोन-94163 48400
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