परीक्षा
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विधा- कविता
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परीक्षा देते देते हारी, जगत में कितनी सीता,
परीक्षा के बल पर ही, देव मन उन्हें जीता,
परीक्षा में पास हो जब, मन में उठती उमंग,
परीक्षा दिल से पास हो, मन उठते नये रंग।
परीक्षा होती धैर्य की, जब मन में हो तनाव,
बात बात पर झगड़ा करते,आये मन में ताव,
शांत होकर जो जी रहे, चाहे दुख हो हजार,
इंसान के क्रोध का, बता देता है हाव भाव।
क्रोध जहां में पाप है, धैर्य धर्म का समूल,
बात बात पर नहीं पकड़ो, कोई भी है तूल,
धैर्य की परीक्षा में, अगर सफल हो इंसान,
सफल हो जिंदगी, बरना बन जायेगी शूल।
बड़ी आशा थी मेहनत कर बेटा हो सफल,
नौकरी मिलेगी, समस्या का निकलेगा हल,
परीक्षा से एक दिन पहले पड़ गया बीमार,
परीक्षा छूट गई,रोया आज,हो गया विफल।
रो रही जग नारी, बन गये लोग व्यापारी,
अपनी परीक्षा देते देते वो तो बेचारी हारी,
कभी जन्म से पूर्व मार दिया है निशाचर,
कभी दहेज के लोभी जलाकर वो है मारी।
मेहनत रंग लायी, अब हुई परीक्षा पास,
दिनरात पढ़ाई की,नंबर आये फिर खास,
प्रसन्नता दिल में हुई,सभी को आई रास,
नौकरी रास्ता साफ हुआ,मन नहीं उदास।
इंतजार बहुत हुआ अब,परीक्षा घड़ी आई है,
धक धक दिल धड़के, दाता आश लगाई है,
परिणाम आएगा परीक्षा का, होंगे हम प्रसन्न,
होठों पर चाहे झूठ हो,दिल में सच बसाई है।
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स्वरचित/नितांत मौलिक
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* होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
शब्द
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विधा-कविता
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शब्द आया जब संसार में, मिटा ज्ञान अंधकार,
बोल चाल की भाषा में यूं,बढ़ा आपस में प्यार,
शब्दों में वो लोच हैं, दुश्मन हो जाये पानी पानी,
अनकहे जब शब्द कहे,दिल का दर्द बढ़े हजार।
शब्द नहीं थे संसार में, चहुं ओर था तब सन्नाटा,
युग बड़ा अजीब था वो, चहुं ओर पाषाण-भाटा,
शब्दों का फिर वार बढ़ा, शब्द ने शब्द को काटा,
जीवन अजब निराला था,बोल ना पाते थे आटा।
शब्द मिले इंसान को, लगा स्वर्ग में आया बासा,
शब्दों का जंजाल बढ़ा तो, पानी की बढ़ी आशा,
शब्दों के बल पर आज, इंसान बन जाये विद्वान,
पूरे जग में शब्दों के बल,जन की बनती पहचान
शब्दों के मधुर संबंध से, सुंदर गीत बन जाते हैं,
शब्दों के उल्टे बोल अब, गाली जगत कहाते हैं,
शब्दों की लय बन जाती, शब्दों से बने बकवास,
शब्द जहां में अमर सदा, ये सच्चे शब्द सुहाते हैं।
शब्द कटु जब बोलते,अपने भी सब बनते पराये,
अपशब्द जुबान से निकले, हर जन को वे डराये,
हँसी खुशी के शब्द बोल, मन को दे देते आराम,
शब्दों के बल पर ही, विद्वान मूर्ख को ही हराये।
शब्दों के बल पर ही,दोस्त दोस्ती को ही निभाये,
दिल को छूने वाले शब्द,प्रेमिका को सदा लुभाये,
गीत, गजल, कविता, शब्दों के बल नाम कमाये,
शब्दों के बल,राधा रानी, कृष्ण को दिल बसाये।
शब्द ही अमृत, शब्द मोती, शब्दों का है संसार,
शब्दों के बल पर ही, जीत भी बन जाती है हार,
शब्द जीता दे, शब्द हरा दे, शब्द हैं बोला बारूद,
शब्द बोल मां के समक्ष,अनहद देती उसको प्यार
शब्दों का न तोड़ मिले,शब्दों से ही निचोड़ मिले,
शब्द गोली से वार करे, शब्दों से मन बाछे खिले,
शब्द नष्ट नहीं होते जग से,घूमते रहते इस जहान,
शब्दों की महिमा अपरमपार, शब्दों से मन जले।
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स्वरचित/मौलिक
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* डा. होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
फोन 09416348400
KANINA MOHALLA-MODIKA WARD-01 DISTRICT-MAHENDERGARH(HARYANA) PIN-123027 Mob 91+9416348400
Saturday, March 26, 2022
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