ज्ञान का भंडार
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किताबें ज्ञान का भंडार हैं,
अमानत इनको लेना मान,
किताबों के ज्ञान से ही बने,
इंसान की जग में पहचान।
बहुत लिखा है किताबों में,
आतंकवाद ना होना चाहिए,
बंदूकों के साये को छोड़कर,
हँसी खुशी ही जीना चाहिए।
बहुत लिखा है पुस्तकों में ये,
हिंसा सबसे बुरी हो बीमारी,
जिसने छोड़ दी हिंसा जगत,
उसकी किस्मत होती न्यारी।
लिखा हुआ है पुस्तकों में ये,
ज्ञान विज्ञान का पूरा ही हाल,
इसलिये वक्त पड़े तो ढूंढकर,
बना रहे जग में निज पहचान।
बहुत लिखा है पुस्तकों में ये,
भाईचारा सबसे बड़ी मिसाल,
जो बैर भाव को अपनाता है,
एक दिन हो जाता बुरा हाल।
पुस्तकों में नहीं लिखा हुआ,
जीवन पा बनो आतंकवादी,
खून खराबा कर दो पल में,
कर दो जग में बड़ी बर्बादी।
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मौलिक/स्वरचित
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*होशियार सिंह यादव
वार्ड नंबर 1, मोहल्ला मोदीका
कनीना -123027
जिला-महेंद्रगढ़, हरियाणा
09416348400
आओ जलाए नफरत की होली
विधा-कविता
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नफरत दिलों में भरी कूट-कूट,
मार काट करती दिखती टोली,
कब भूलेंगे ये नफरत की आंधी,
आओ जलाए नफरत की होली।
लड़ाई झगड़ा दंगा और फसाद,
कहीं बम चले कहीं चले गोली,
कब शांति से जीना सीखेगा जन,
आओ जलाए नफरत की होली।
सीमाओं पर बढ़ता जाए तनाव,
खून से भरी मिलती कई झोली,
शांति के दूत भी पच पचके हारे,
आओ जलाए नफरत की होली।
शाम सवेरे जहां भी जाएं मिलता,
मां बहने लगा रही खून की रोली,
कितने सुहाग उजड़ चुके जगत से,
आओ जलाए नफरत की होली।
बच्चा बच्ची रो रहे पिता खोकर,
बहनों की रो रो बंद हुई है बोली,
मिटा दो अब तो नफरत की आग,
आओ जलाए नफरत की होली।
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स्वरचित/नितांत मौलिक
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*डा होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
फोन 09416348400
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