Friday, March 11, 2022

                       मन की बातें

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विधा-कविता   
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मन की बातें, हो बड़ी मतवाली,
कभी दिन होते,कभी रातें काली,
गति मन की,नहीं जाएगी खाली,
जन तन का वो कहलाता माली।

मन की बातें, मन ही सदा जाने,
आम आदमी  उन्हें कब पहचाने,
मन अपना हो, नहीं मिले बेगाने,
स्वच्छंद चलता रहे,न सहता ताने।


मन मंदिर सम, बताया है जग में,
पूजा होती है, बस इसकी तन में,
मन पर काबू रखना सदा चाहिये,
वरना हर वक्त दुख दर्द ही पाइये।

मन चंचल जन का जब मिलता,
नया नजराना हरदम ही खिलता,
मन के आगे कितने गये हैं हार,
मन मरवा दे, कभी कर दे उद्धार।


सच्चे कर्म मन से सदा ही करना,
पाप कर्म, अहित से सदा डरना,
सचाई की राह कभी मन दिखाये,
तन खुश मिले,जब खुश हो जाये।

मन की बातें, मन में मत रखना,
सुख दुख का सब स्वाद चखना,
मन कर सकता, जन को बेचैन,
हँसे या रोये, निस दिन ये नयन।


मन से करना कभी कोई दोस्ती,
स्वार्थ को मन से, रखना यूं दूर,
दोस्ती भली हो,नहीं करो गरूर,
दोस्ती अपनों की, प्रेम हो जरूर।

लो महकाये, निज इस मन को,
नहीं सताये, अपने इस तन को,
आगे एक दिन मन खुद कहेगा,
दिल की बातें हैं,दिल में रहेगा।

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स्वरचित/मौलिक





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* डा. होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400

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