कुछ यादें अक्सर
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विधा-कविता
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कुछ यादें अक्सर, छोड़ जाती अमिट छाप,
भुला नहीं पाते जीवनभर,जन जाते हैं भांप,
यादों के सहारे कट जाती है पूरी ही जिंदगी,
खूबसूरत हसीं दिनों को करते रहते हैं जाप।
कुछ यादें अक्सर,रह रहकर आती रहे याद,
कभी हँसते रहते थे, कभी करते थे फरियाद,
दिल को तड़पा जाती है, यादों के सुंदर पल,
कभी कभी ये यादें ही,बन जाती हैं बुनियाद।
कुछ यादें अक्सर, ख्वाबों में यूं बस जाती हैं,
एकांत जीवन में यादें मन को ही तड़पाती हैं,
यादें कभी कभी दे जाती है बड़ा भारी कष्ट,
यादें आती हैं, सताती हैं और चली जाती हैं।
कुछ यादें अक्सर,बचपन की याद दिलाती हैं,
तितली सम उड़ते फिरते भूख नहीं सताती है,
यादों को छोडऩा, इंसान के लिए होता कठिन,
कुछ यादें मन में तो कुछ दिल में बस जाती हैं।
कुछ यादें अक्सर, दे जाती जन को ही धोखा,
क्या जमाना होता था, लोग देखते थे वो मौका,
यादों को दिल में बसा,सारी उम्र लेते हैं गुजार,
यादें जब जहन में बस जाये, रंग आता चौखा।
युवा समय की यादें, अनमोल धरोहर होती है,
कलियुग का जीवन देख,यादें ही बड़ी रोती है,
यादों को दिल से निकालना, नहीं हो आसान,
यादें तो जिंदगी में भी, नये बीज कभी बोती हैं।
बुढ़ापे में यादें, महज बन जाती हैं एक सहारा,
कभी कोई याद बुरी हो,यादों में आ जाए प्यारे,
यादें मौत के बाद भी,लोगों के जुबान पर आये,
अरदास प्रभु,यादें एक बार दिल में आये हमारे।
यादें हर इंसान के जहन में रंगी बसी मिलती हैं,
यादों के सहारे ही, मन की कलियां खिलती हैं,
यादों को कह दो सदा मन को यूं तड़पाती जायें,
दिल में बसी हैं यादें , दिल से नहीं हिलती हैं।।
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स्वरचित/मौलिक
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* डा. होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
फोन 09416348400
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