कविता
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एकता
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पौधे जीवन का आधार,
करते मानव से ये प्यार,
बारिश,हवा,फल देते हैं,
देते भोजन का आधार।
एकता में बंधे हुये मिले,
प्रकृति का रखते ख्याल,
पर इंसान को देख जरा,
करता प्रकृति बदहाल।
आक्सीजन देते पेड़ भी,
प्रदूषण को करते हैं कम,
काट रहा इंसां इन्हीं को,
देखकर आंखें होती नम।
बारिश का आधार होते,
इनको काटो ये भी रोते,
दिनरात देते पेड़ भी सेवा,
जागते हैं कभी नहीं सोते।
पेड़ रखते हैं निज दोस्ती,
मानव को देते यह शिक्षा,
मत नहीं काटों इनको यूँ,
मांग रहे बसे यह भीक्षा।
आओ प्रकृति करे ख्याल,
पौधों की करेंगे देखभाल,
ये खुश होंगे धरा पर तो,
रखेंगे हमको खुश हरहाल।।
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मौलिक/स्वरचित
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*होशियार सिंह यादव
वार्ड नंबर 1, मोहल्ला मोदीका
कनीना -123027
जिला-महेंद्रगढ़, हरियाणा
09416348400
जरूरत
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विधा-कविता
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जरूरत ही इंसान को, करवाती है काम,
बिना जरूरत इंसान,मिलता बड़ा बेजान,
जरूरत के मुताबिक ही,बटा हुआ काम,
जरूरत के कारण, व्यस्त हो सुबह शाम।
जरूरत धन की कभी, मारा मारा फिरता,
कभी खड़ा हो द्वारे,कभी नाले में गिरता,
मेहनत करने पर जन, धन दौलत मिलता,
पाकर दौलत जन,चेहरा फूल सा खिलता।
जरूरत पड़ी इंसान को, खोजे जंगल गांव,
कहीं जरूरत के कारण,चिल्लाये कांव कांव,
जरूरत ही इंसान को,मिलता सच्चा गुरुवर,
जरूरत के बल,पहलवान लगा रहा है दाव।
जरूरत पड़ी गंगा की,सगर किया बड़ा तप,
सगर गये अंशुमान गये,भागीरथ किया जप,
गंगा धरती पर आई, पितरों का कर उद्धार,
चहुं ओर प्रकाश हुआ, बज उठे फिर ढप।
जरूरत होती मात पिता, रखे बच्चे की खैर,
अपनों के पास आए, दूजे को समझता गैर,
जरूरत के बल पर ही, होता जगत में नाम,
जरूरत के कारण ही,बढ़ता जा जन का पैर।
जरूरत गुरु की पड़ी, एकलव्य मिला द्रोण,
मिली नहीं शिक्षा तो, गुरु मान किया काम,
निपुण हुआ धनुर्विधा में, जमाया रंग कमान,
अंगूठा मांगा द्रोण ने,फिर भी हुआ जग नाम।
जरूरत होती फसल को, पानी देता किसान,
जरूरत होती शिक्षा की, बच्चा ले गुरू मान,
जरूरत हर इंसान की, देखें हैं प्राणी भी तंग,
जरूरत पड़ी जन को, कहलाया ज्ञान विज्ञान।
जरूरत ही अविष्कार है, करवाती नये काम,
इंसान जुटा रहता मिले, सुबह हो फिर शाम,
जरूरत बिना इंसान तो, नहीं रहेगा वो इंसान,
जरूरत होती वो जाये,वन,शिकार या हो धाम।।
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* डा. होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
फोन 09416348400

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