बिना बात किये
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विधा-कविता
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बिना बात किये कभी, खुलता नहीं भेद,
भेद जगत में मानते,एकता में करता छेद,
शक्ति बनती शक्तिहीन,भेद कभी न खोल,
खोल दिये जब भेद तो,होता है बड़ा खेद।
बिना बात किये लोग, मन में बांधते गांठ,
मुंह सूजा कर लेते हैं,भूल जाते सब ठाठ,
बातें करके दुश्मन से, मिटती है मनमुटाव,
छोटी उम्र दर्द में, उम्र बना देती जन साठ।
बिना बात किये लोग, सच रहती सदा दूर,
बातों ही बातों में, मिट सकता है जन गरूर,
शांत कभी नहीं बैठिये, मिले जहां का भेद,
सुख अमन चैन से, चेहरे पर मिलता है नूर।
बिना बात किये कभी,बनाना नहीं कभी बैर,
मन में अगर बैर बने, समझो जन नहीं खैर,
भेद सारे खुल जाते, आता जब कभी सामने,
जब कभी दुख दर्द पड़े,बन सकता निज गैर।
बिना बात किये कभी,बैठे दिल में बड़ा घाव,
घात लगाकर बैठे जन, कभी चकते रहे दाव,
सोच समझकर चलना, जग होता दुख दरिया,
अच्छे अपने पूत के,पालने में ही दिखते पांव।
बिना बात किये ही, सोच बैठते बुरी सी बात,
दर्द जहां के मिल जाये, नींद नहीं पूरी ही रात,
सत्कर्मों के बल पर ही,जन का हो जाता नाम,
सारे काम पिट जाये, बुरे कभी होते हैं हालात।
बिना बात किये, नहीं होता समस्या समाधान,
हर काम बिगड़ जाये, नहीं हो पाता समाधान,
आपसी वार्तालाप से, होता है मन का भी मैल,
अच्छे जन इंसान खातिर, होते हैं दिल व जान।
बिना बात किये तो,अपने भी हो जाते सब दूर,
भरे घर में लगते सभी बुरे,मिट जायेगा तन नूर,
हँसते गाते जो रहते हैं, बन जाते हैं सभी काम,
नम्र बनकर रहना चाहिए, नहीं करना है गरूर।।
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* डा. होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
फोन 09416348400
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