आशा
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विधा-कविता
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आशा और निराशा में,
बीत रही राह जिंदगी,
सपने मन में लिये हुये,
कैसी बनी है बंदगी?
हर मां बाप चाहता है,
पढ़ लिख बने महान,
पर किस्मत को देखिये,
कूड़ा बिनना है शान।
दो पैसे कूड़े से पाकर,
सब्र कर ले छोटी जान,
कहां कहां वो घूमती है,
कैसी बनी है पहचान।
आएगा वो एक दिन,
जब स्कूल मिले राह,
लिखे पढ़े शान बनेगी,
लोग करेंगे वाह वाह।।
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स्वरचित/नितांत मौलिक
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* होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
फोन 09416348400
यात्रा वर्णन
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छंदमुक्त कविता
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हरिद्वार की सैर पर
गये लोग हम चार,
खाना पीना संग था,
आपस में बड़ा प्यार।
गंगा में डुबकी लगी,
मिला शिवालय ज्ञान,
कहीं पैदल चल पड़े,
कहीं किया हमें दान।
हर हर गंगे सुना बड़ा,
मंदिरों में आरती शोर,
शाम बहुत सुहावनी,
पर्वत ऊपर कई मोर।
दो दिवसीय थी यात्रा,
मन में भर गई उमंग,
आस्था दिल में जगी,
उभरा मन में एक रंग।
प्रसन्न है मन आज भी,
याद करके यात्रा वृतांत,
घर आये देर शाम को,
हुआ सफर हमारा अंत।।
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स्वरचित/नितांत मौलिक
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* होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
फोन 09416348400


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