Saturday, March 19, 2022

 आओ जलाए नफरत की होली
************************************
*****************************************
************************************
***
विधा-कविता

***********************

नफरत दिलों में भरी कूट-कूट,
मार काट करती दिखती टोली,
कब भूलेंगे ये नफरत की आंधी,
आओ जलाए नफरत की होली।

लड़ाई झगड़ा दंगा और फसाद,
कहीं बम चले कहीं चले गोली,
कब शांति से जीना सीखेगा जन,
आओ जलाए नफरत की होली।


सीमाओं पर बढ़ता जाए तनाव,
खून से भरी मिलती कई झोली,
शांति के दूत भी पच पचके हारे,
आओ जलाए नफरत की होली।

शाम सवेरे जहां भी जाएं मिलता,
मां बहने लगा रही खून की रोली,
कितने सुहाग उजड़ चुके जगत से,
आओ जलाए नफरत की होली।


बच्चा बच्ची रो रहे पिता खोकर,
बहनों की रो रो बंद हुई है बोली,
मिटा दो अब तो नफरत की आग,
आओ जलाए नफरत की होली।
*****************
स्वरचित/नितांत मौलिक
******************
* होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400


होली
**************************
**************************************
विधा-कविता   
*****************

रंग गुलाल बहार लेके,घर आंगन आई होली,
रंग पिचकारी खेल रहे,भिगो रहे जमकर झोली।
रंग बिरंगे चेहरे बन गये,फाल्गुन का है त्योहार,
हर चेहरा मासूम लगता,लगता जैसे बिखरे प्यार।

बुरा ना मानों होली है,कहकर फेंक रहे गुलाल,
बच्चे,बूढ़े,नर और नारी,पिचकारी से करे कमाल।
दिल में होली जलती थी,अब झलकता है प्यार,
लाल,पीले,गुलाबी रंग,होली दुलेंडी का त्योहार।


बैर भाव अब भूल चुके,मन में उमंग उठे हजार,
नहीं कोई अब चिंता है, रंगों का होली त्योहार।
हर वर्ष आता यही है, रंग बहारों का होता पर्व,
आपस में करे दोस्ती, मन में उत्पन्न होता है गर्व।

रखना मन को खोल, वरना खुल जायेगी पोल,
हँसी खुशी गुजार लो, जिंदगी होती है अनमोल।
रंग बिखरे जाते कभी, छूट न जाये जिंदगी डोर,
सब कुछ  धरा रहता, आती है ऐसी वह भोर।।

फाल्गुन आया उमंग ले, भीगा तन मन सारा,
प्यार दिलों में ही पलता, लगता सबको प्यारा।
फाल्गुन में चहुं ओर है, नृत्य, ढफ,फाग बहार,
समय पर आकर पा लो,मिलती नहीं ये उधार।


फाल्गुन का ही शोर है,जहां भी जाये उस ओर,
कहीं फूलों में रंग चढ़ा,कहीं नाच रहे वन मोर।
देख देख हर्षा रहे है,फाल्गुन की अजब बहार,
सूने मन का न छोडऩा,हो जाएगा जनाब प्यार।।

राधा के संग श्याम, खेली थी जमकर होली,
आपस में रंग डालते, आती  थी जब टोली।
रंग पक्का था प्यार का,बेशक शरीर कहो दो,
पूरे जग में ही नाम है, कह गये जगत में वो।


नहीं कभी वो दूर थे,जगत सारा है जानता,
अमिट प्यार राधा का,जन जन यह मानता।
रंगों के त्योहार पर, बांटते थे वो सभी दर्द,
गर्मी आये या बसंत, या चलती हवा सर्द।

रंगों के त्योहार पर,राधा कृष्ण को सलाम,
सदियों तक यूं चले, जगत में हरदम नाम।।
आता है होली पर्व, भर देता है दिल उमंग,
गुलाल में सराबोर हैं, भीगे हैं तन मन रंग।


लाल, हरे, पीले हुये, चेहरे चमके आज,
खुशी दिल में भरी, छुपे हुये हैं कई राज।
तन मन सब भीगे, डाल रहे जमकर रंग,
नशे में जन झूमते, जैसे पीये हो कोई भंग।
*****************
स्वरचित/मौलिक




******************
* डा. होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400

No comments: