राक्षसों की दुनिया लघुकथा
(लघुकथा सत्य घटना आठ मार्च 2022 की है जिसके विडियो एवं फोटो मेरे पास उपलब्ध है)
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हावड़ा-बीकानेर सुपर फास्ट ट्रेन खचाखच यात्रियों से भरी थी जिसमें अधिकांश सीटों पर पुलिसनुमा यात्री लेटे हुए थे तथा जिनकी बुकिंग की सीट थी वो बेचारे मायूस खड़े थे। कहने को तो पुलिस वाले देश सेवा करते हैं किंतु इस विभिन्न कोच में इस प्रकार भरे हुए थे जैसे भेड़ बकरियां ठूंस ठूंसकर भरी हुई हो। बेचारे बुकिंग करवा कर सीट रिजर्व करने वाले खड़े हुए थे उनको सीट नहीं दे रहे थे और सीट मांगने पर लडऩे को तैयार थे। और ये पुलिस वाले एक दूसरे से भद्दी गाली गलौज करते हुए, बीड़ी सिगरेट की धुआं के गुब्बार छोड़ते हुए और ऐसे बैठे हँस रहे थे जैसे इनके बाप दादा की गाड़ी हो। जहां मन में आया उसी जगह चेन खींचकर गाड़ी को रोक देना आज के दिन आदत बन गई थी। पहले ही गाड़ी 2 घंटे लेट थी बेचारे गाड़ी में चलने वाले बेबस थे जो भी बोलना चाहे, उस पर पुलिसनुमा व्यक्ति ऐसे टूट पड़ते पुलिस वाले जैसे टूट पड़ते जैसे भेडिय़े घात लगाये पड़े हो। शराब की चर्चाएं तथा कभी शिक्षकों तो कभी पटवारियों की बुराई करके हँस रहे थे। उनको देखकर ऐसा लग रहा था कि रक्षक नहीं ये भक्षक बने हुए है । मरीज एवं दूर दराज जाने वाले बेचारे परेशान थे। अपने गंतव्य स्थान पहुंचने इंतजार कर रहे किंतु यह इतनी अश्लील भाषा प्रयोग कर महिलाओं का अपमान करने में मजे लूट रहे थे। यात्री बेहद परेशान थे और गाजियाबाद आने का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। गाजियाबाद आने के बाद यात्रियों ने राहत की सांस ली चूंकि अधिकांश ये पुलिसनुमा लोग गाड़ी से उतर गये। आज गाड़ी में बैठे या खड़े लोग अपने आप को राक्षसों की दुनिया एवं नरक में आने का आभास कर रहे थे। जिनकी सीट छीन गई थी वो पुन: पाकर उनको मन ही मन में हजारों गालियों की बौछार कर रहे थे।
KANINA MOHALLA-MODIKA WARD-01 DISTRICT-MAHENDERGARH(HARYANA) PIN-123027 Mob 91+9416348400
Wednesday, March 09, 2022
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