घड़ा
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विधा-कविता
घड़ा
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गर्मी दस्तक दे चुकी, मन होता बेचैन,
ठंडा जल घड़े का, देता मन को चैन,
घड़ा घड़ते कुम्भकार, होगी बिक्री तेज,
आज भी बहुत से लोग,घड़े के हैं फैन
यूजीनोल पदार्थ से, ठंडा घड़े का जल,
रोगों से छुटकारा मिले, समस्या हो हल,
देशी फ्रिज का काम दे,कीमत होती कम,
देख घड़े का नीर तो, मन जाता है मचल।
गली गली में बेचते, सौ रुपये से न कम,
बुजुर्ग लोग ले चाव से, होता तन में दम,
फ्रिज जैसा ठंडा मिले, आता घड़ा काम,
ऐसे में जल पीजिये,सुबह हो या हो शाम।।
ले आओ एक घड़ा अब, क्यों बैठे नाराज,
पीकर जल घड़े का, उभरेगा मन एक राज,
सदियों से घड़े पर, जन जन को बड़ा नाज,
घड़ा घरों में रखना,घर की होता यह लाज।।
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स्वरचित/मौलिक
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* होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
नूतन वर्ष
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विधा-कविता
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हिंदु नववर्ष की मुस्कान,
समस्त जग में है पहचान,
राजा विक्रमादित्य की देन,
राजा बने वो अति महान।
गुड़ी पाड़वा नाम इसी का,
नवरात्रों को लेकर आता है,
देशी महीनों के नाम याद,
जन जन को यह दिलाता है।
बनाते हैं घर घर में पकवान,
नव वर्ष भारतीयता पहचान,
हूणों को हराया था इस दिन,
हर इंसान के दिल की जान।
अक्सास नदी में पिला पानी,
विक्रमादित्य किया श्रीगणेश,
वर्तमान में उनको याद करते,
बस उनकी यादें हैं अभी शेष।
मना रहे जब नव वर्ष कभी,
रखना चैत्र प्रतिपदा को याद,
भूलते जा रहे नव वर्ष को तो,
अवशेष रहेगा वर्षों के बाद।।
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नितांत मौलिक एवं स्वरचित
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* डा होशियार सिंह यादव
वार्ड नंबर 11, मोहल्ला मोदीका
कनीना-123027
जिला महेंद्रगढ़, हरियाणा
फोन 9416348400

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