राजनीति
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विधा-कविता
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राजनीति इस देश की, मानी जाये धुरी,
चहुं ओर इसके घूमते,लगती कभी बुरी,
हर इंसान की ख्वाहिश,बने वो राजनेता,
मार करे ऐसी तीखी, जैसे हो तेज छुरी।
राजनीति के दाव पेच, ज्ञाता जग में जो,
वोट पाता मतदाता का, निज नीति से वो,
नेताओं की बुद्धि,घूमती वोट पाने खातिर,
वोट दे देते जब कभी,चाहे जितना ले रो।
राजनीति वो गूढ़ ज्ञान, नेता रखते हैं पूरा,
नहीं सफल हो पाएं,अगर ज्ञान है अधूरा,
जहां भी देखे नेता के, पीछे मिलते लोग,
राजनीति को कह रहे, लोग बड़ा है रोग।
राजनीति की शिक्षा पा,कर दे माइंड वाश,
बिखर जाएंगे लोग मुद्दे पर, जैसे पत्ते ताश,
कहीं कहीं यह राजनीति,कर दे बड़ा काम,
पर अधिकांश वक्त, कर देती सारा विनाश।
राजनीति को सीखते, कहलाते जगत नेता,
वोट पाने की खातिर,मधुर वक्तव्य वो देता,
वादों से भरा मिले, करे पूरे मौखिक काम,
अपनी वाकपटुता के बल,जनता वोट लेता।
वोट की जरूरत होती, मिलता हाथ पसारे,
मिले वोट फिर गायब, हर जन को बिसारे,
अपने प्रतिद्वंद्वी को, हरदम देता रहता मात,
कभी कभी वो वक्त आये, धुरंधर नेता हारे।
राजनीति बड़ी कुशल हो,समय जाता भांप,
उल्टी सीधी बात करे,करता रहे नीति जाप,
चाहे कितने वोट मिले,नहीं आए उसे धाप,
गिरने की सीमा का,नहीं बना अबतक नाप।
राजनीति के सामने, दुनिया मिलती है फेल,
चुनाव लड़ते हैं नेता,चाहे होती उनकी जेल,
कभी कभी तो लगता, नेता, राजनीति बेमेल,
दिन रात बस नेता की चुनाव समय बने रेल।।
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स्वरचित/मौलिक
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* डा. होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
फोन 09416348400
मीरा का कृष्ण प्रेम
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विधा-कविता
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प्रेम प्रतीक्षा, बड़ा दर्द दे जाती,
तब जाके मिलन घडिय़ा आती,
किस्मत का सेब खेल दिखाती,
खुशियां मिले फिर लौट जाती।
प्रेम प्रतीक्षा, कड़वा होता बाण,
घटती दृष्टि, घट जाती है घ्राण,
प्रेम मिलन में कभी बसे प्राण,
प्रेम बिना लगता जन निष्प्राण।
प्रेम प्रतीक्षा, सदियों से पुरानी,
कहीं हीर हुई कहीं राजा जानी,
प्रेम प्रतीक्षा नहीं, करे मनमानी,
मिलन होता कभी,नहीं हैरानी।
प्रेम मार्ग बहुत कठिन बताया,
चलकर गया उसने कुछ पाया,
मौत को जिसे गले से लगाया,
वो प्रेम में डुबकी लगा पाया।
प्रेम किया जब शीरी फरियाद,
उन्हें हसीं जमाना याद आया,
प्रेम प्रतीक्षा, मीरा ने किया था,
प्रभु श्रीकृष्ण का, प्यार पाया।
लैला मजनूं की जोड़ी जग आई,
दुनिया हँसी,छवि दिल में बसाई,
पर अपने जब बन जाते हैं कसाई,
नाम रह जाता है,कि प्रीत निभाई।
विष का प्याला, जब पी डाला,
मीर बन गई श्रीकृष्ण की प्यारी,
प्रतीक्षा करके जग में पाया नाम,
देखो फिर मिलन घड़ी की तैयारी।
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स्वरचित/मौलिक
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* डा. होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
फोन 09416348400

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