Monday, March 21, 2022

 
                           सुनता जा
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विधा-कविता/सुनता जा
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देश की सीमा पर जाता,
एक बात मेरी सुनता जा,
सुरक्षा करना तन मन से,
बस यादें दिल बुनता जा।

दुश्मन को सदा मार गिरा,
रण में नहीं पीठ दिखाना,
सीना चौड़ा करके देश को,
मातृभूमि को शीश नवाना।


हार जाये तो क्या वीरता,
बेशक रण में मर जाना,
पर घर पर जब आये तो,
नाम कमाकर ही आना।

अगर शहीद हो जाएगा,
युगों युगों तक रहे याद,
पर दुश्मन से टकराकर,
करना नहीं है फरियाद।


कंधों पर है भार देश का,
मन में सदा इठलाता जा,
बहादुर सिपाही आगे बढ़े,
जग उनके गीत गाता जा।


कभी याद हमें भी करना,
हम तुमको याद करते अब,
जाकर सीमा पर पहरा देना,
बस इतनी ही दुआएं हैं रब।।


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स्वरचित/मौलिक
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* डा. होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
09416348400




दिन गुजरता है
विधा-कविता   
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दिन गुजरता है, रात फिर आती है,
सूर्य उदय होता,उजाला मदमाती है,
दिनभर की यादें, रात को सताती हैं,
दिनोंदिन कर जिंदगी बीत जाती है।

दिन गुजरता है, लोग दौड़ पड़ते हैं,
पक्षी चहचहाते जब, पशु विचरते हैं,
रात के अंधेरे में,कितने पाप पलते हैं,
इंसान बुरे लोगों से, जमकर डरते हैं।


दिन गुजरता है, कोई आंसू बहाता है,
किसी को अंधेरा, जमकर सुहाता है,
किसी की जिंदगी, धीरे धीरे जाती है,
कुछ अनकहे गीत, जिंदगी सुनाती है।

झरने भी बहते हैं, नदियां  चलती हैं,
होले-होले अंगड़ाई दिल में पलती हैं,
खेल कूद में में हँसी,दिल में चलती है,
अनेक अजीब बातें,मन में मचलती हैं।


दिन गुजरता है, मन आराम पलता हैं,
दिनभर की थकान, मन में खलता है,
आते जाते कितने, कारवां निकलता है,
कोई बेचारा बैठकर,हाथ ही मलता है।


दिन रात की कड़ी,जैसे होते सुख दुख,
कोई कष्टों के समक्ष,जाता है तुरंत झुक,
आने वाला समय भी, किसका साथी है,
पता नहीं कौन कब मिलता है विमुख।

शाम आती हैं, एक पैगाम देके जाती हैं,
बीतें दिनों की यादें मन को तड़पाती हैं,
एक दिन वो शाम चलकर ही आती है,
भोर की किरणें चहुं ओर तरफ आती हैं।


दिन गुजरता है, एक एक दिन बढ़ता है,
रात फिर आती हैं, वो भी चली जाती है,
एक बार सोच जरा, जिंदगी मदमाती है,
कौन किस घड़ी में ,साथ ही छूट जाती हैं।
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स्वरचित/मौलिक
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* डा. होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01




कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400


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