Tuesday, March 31, 2026



     ओलावृष्टि
जमकर हुई ओलावृष्टि,
कृषक पड़ी मार कसूती।
मुआवजे की मांग करेंगे,
किस्मत भी लगती रूठी।।
कितनी मार सहन करके,
उगाई थी अपनी फसल।
आज कल पैदावार लेंगे,
वर्षा में फसल गई गल।।
**डा. होशियार सिंह यादव
कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा


   बादल
बादल छाते आकाश में,
दर्द सीने में हो किसान।
अंधड़, ओलावृष्टि को,
मानते कृषक के शैतान।।
गर्मी,सर्दी सहकर सींचे,
खेत में चलाता रहे हल।
मुश्किल से फसल उगा,
मिले आधा अधूरा फल।।
*डा. होशियार सिंह यादव
कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा

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