खाने के ढेर
बासौड़ा के नाम पर लगे हैं,
चौराहों पर खाने के ही ढेर।
कुत्ते,सुअर छक गये खाकर
,
बुधवार को डालेंगे जन फेर।।
तीन सप्ताह चलता बासौड़ा,
अजब गजब हैं रीति रिवाज।
संस्कृति को देख देखकर के,
होता हर जन को ही नाज।।
**डा. होशियार सिंह यादव
कनीना, जिला-महेंद्रगढ़,हरि.
घड़े
देसी फ्रिज नाम पड़ा घड़ा,
गर्मी में जन कर दे मलंग।
फ्रीज का ये रूप कहलाते,
अंग अंग में भर देते उमंग।।
बीमार नहीं हो सकते लोग,
दूर कर देते हैं जन के रोग।
हर जगह मिल जाएंगे सोच,
तन मन को कर देंगे निरोग।।
***डा. होशियार सिंह यादव
कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा***

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