Sunday, March 15, 2026

 
   आग



सबसे विनाशक आग कहो,
मन ही मन जलते जब लोग।
कतई राख बन जाती पल में,
कैसी सोच जन कैसा है रोग।।
कलुषित मानसिकता रखते हैं,
समाज के दुश्मन कहलाते हैं।
जन जन की खुशियां देखकर,
उनकी आंखों से आंसू बहते हैं।।
**डा. होशियार सिंह यादव,
विश्व रिकार्डधारक, कनीना**





           ख्वाब
कर्म बुरे इंसान के, चाहत ऊंचे ख्वाब,
साधारण गडरिया, बनना चाहे नवाब।
पिटाई का पात्र भी,चाहे पगड़ी धारण,
आशु कवि ख्वाब में देखे भाठ चारण।।
कद्र नहीं जो जानता,चाहे खूब सलाम,
गुलामी की जिंदगी,चाहत कई गुलाम।
धर्म,कर्म,परहित को मिले स्वर्ग धाम,
ऐसे पवित्र जन को करें लोग सलाम।।
***डा. होशियार सिंह यादव,कनीना
विश्व रिकार्डधारक, महेंद्रगढ़, हरियाणा







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