बिछुडऩा
पता नहीं कब कौन बिछुड़ता,
अपने तन मन में प्रीत जगा ले।
पाप,अहित का छोड़कर चोला,
परहित धर्म की प्रीत सजा ले।।
कितने पापी आये गये जग से,
उनको कोई भी नहीं याद करे।
आगे पीछे न कोई याद करेगा,
लाखों कीड़ों की भांति वो मरे।।
**होशयार सिंह यादव,कनीना
जिला-महेंद्रगढ़, हरियाणा***
डीजे
डीजे बजते चहुं ओर अब,
जमकर फोड़ रहे है कान।
डीजे बजाकर इंसान जहां,
समझ रहा बढ़ गई है शान।।
बहरे होंगे कितने ही लोग,
बढ़ जाएंगे पेट के भी रोग।
गिर सकते जन मकान भी,
करनी का फल पड़ता भोग।।
**डा. होशियार सिंह यादव
कनीना, महेंद्रगढ़, हरियाणा

No comments:
Post a Comment