Thursday, March 19, 2026


  बेमौसमी वर्षा
किसानों की फसल पकी है,
ओले,अंधड़, वर्षा का कहर।
तबाह होती है जब मेहनत तो,
पीना पड़ता तब कड़वा जहर।।
गेहूं की खड़ी फसल गिर गई,
इकट्ठी की हुई सरसों उड़ गई।
सर्दी और जाड़े की मार सहके,
सारी आशाएं मिट्टी में मिल गई।।
**होशियार सिंह यादव,कनीना

             एहसास
गर्मी में सर्दी का हुआ एहसास,
बैमौसमी वर्षा नहीं आती रास।
ओलावृष्टि देख अटक गई सांस,
गेहूं, सरसों में हुआ है कुछ नाश।।
ईश्वर देता और वो ही अब लेता,
कभी भर देता कभी रख दे रीता।
करते रहना अथक प्रयास जगत,
जो सफल हुआ समझ लो जीता।।
डा. होशियार सिंह यादव,कनीना
विश्व रिकार्डधारक, महेंद्रगढ़,हरि

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