Tuesday, March 03, 2026

     होली दहन



होलिका अब जल चुकी,
जन गीत खुशी के गाते हैं।
भक्त प्रह्लाद बचाने खातिर,
बस प्रभु को शीश नवाते हैं।।
नरसिंह अवतार लिया जब,
हिरण्याकश्यप संहार किया।
दाता-भक्त के बीच प्रेम का,
अनमिट सकल उपहार दिया।।
**डा. होशियार सिंह यादव
कनीना,जिला-महेंद्रगढ़,हरि.

रंगों का पर्व
रंगों में रंग गये जन,होली का है त्योहार,
रंग डाले, पिचकारी मारे,उभरे रंग हजार।
नाराजगी गायब मिलती,रंग भरा है प्यार,
गम छोड़ खुशी मिले,जीवन का आधार।।
सप्तरंगी चेहरे बने,काले, पीले या लाल,
हाथ मिले, गले मिले,पूछ रहे सब हाल।
कुछ भांग के नशे में डूबे,बदली है चाल,
आपस के प्रेम को देख ऊंचा होता भाल।।
**डा. होशियार सिंह यादव, कनीना



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