पाप
पाप बढ़ाये धरती पर, कहते हमने उपकार किया,
दान नाम की आड़ ली, कितने ही निर्धन खून पिया।
कुतरूं बनकर आये जग, मेहनतकश को दर्द दिया,
चंद पैसों की लालच दे,नारी का चरित्र हरण किया।।
ढोंग रचाया मंदिर बैठे, धन दौलत को साफ किया,
असली रूप छिपा रखा, ऐसा क्या वो जीवन जीया।
झूठ बोलकर लोगों से, धन ऐंठा और इंसाफ किया,
सता आत्मा लोगों की, अधर्म, पाप,अभिशाप लिया।।
***डा. होशियार सिंह यादव,कनीना,हरियाणा
लावणी
होली तो अब हो ली,लावणी की कर तैयारी,
दिन रात मेहनत की,किसान को फसल प्यारी।
गेहूं,सरसों खड़ी हुई, सरसों पक कर है तैयार,
करोड़ों का पेट भरे,कृषि जीवन का है आधार।।
मार्च-अप्रैल लावणी चले,मिले किसान व्यस्त,
जाते हैं खेतों में, आते हैं जब सूर्य होता अस्त।
फटेहाल में जीता है,किसान की सुन लो पुकार,
कभी पाले की मार तो कभी ओलावृष्टि की मार।
**डा. होशियार सिंह यादव, कनीना, महेंद्रगढ़
विश्व रिकार्डधारक , हरियाणा**********
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Thursday, March 05, 2026
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