Friday, March 13, 2026

 

           ख्वाब
कर्म बुरे इंसान के, चाहत ऊंचे ख्वाब,
साधारण गडरिया, बनना चाहे नवाब।
पिटाई का पात्र भी,चाहे पगड़ी धारण,
आशु कवि ख्वाब में देखे भाठ चारण।।
कद्र नहीं जो जानता,चाहे खूब सलाम,
गुलामी की जिंदगी,चाहत कई गुलाम।
धर्म,कर्म,परहित को मिले स्वर्ग धाम,
ऐसे पवित्र जन को करें लोग सलाम।।
***डा. होशियार सिंह यादव,कनीना
विश्व रिकार्डधारक, महेंद्रगढ़, हरियाणा


सिलिंडर की मारामारी
युद्ध छिड़ा कई देशों में,
विश्वयुद्ध की है तैयारी।
तेल, गैस की कमी हुई,
सिलिंंडर की मारामारी।।
धांसे,उपले काम आएंगे,
लकड़ी जला बने रोटी।
समझ न पाये वक्त मार,
उसकी अक्ल है मोटी।।
**डा. होशियार सिंह
कनीना,महेंद्रगढ़,हरि.


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