Saturday, March 07, 2026

 

        साथी
निर्धन का साथी कोई नहीं,
बस केवल ऊपर वाला है।
जिस किस पर विश्वास करे,
फेरे निज हित की माला है।।
स्वार्थ भरा संसार कहलाए,
पाप,अहित में डूबे हैं लोग।
पीठ पे बुराई करने का यह,
बहुत बुरा लगा जन रोग।।
**डा. होशियार सिंह यादव
कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा**

     ताले
नहीं मानते हार कभी हम,
वो हिम्मत रखने वाले हैं।
सीधी सादी वेशभूषा लगे,
सच्चे मन के नहीं काले हैं।।
सोच लिया कर दिखलाते,
पीछे हटना फिर बात नहीं।
दुष्टों को सबक सिखा देते,
नहीं खुल पाये वो ताले हैं।।
**डा. होशियार सिंह यादव
कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा**




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