फांसी
नहीं झुके और नहीं डिगे वो,
आगे बढ़कर फांसी खाई थी।
हजारों वीरों ने दी थी कुर्बानी,
तब देश की आजादी आई थी।।
फांसी खाकर दिया था पैगाम,
वीरों की भूमि भारत है नाम।
अधूरा सपना पूरा हो चुका है,
करना याद आजादी की शाम।।
**होशियार सिंह यादव
कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा***
कढ़ाइयां
नवरात्रों को शुभ मानकर,
कढ़ाई और हो रहे हैं रोट।
अपने मन को शुद्ध करते,
मार रहे हैं पापों को चोट।।
जीवन का हो एक मकसद,
परहित, भलाई करना काम।
अहित,पाप में डूबे आकंठ,
एक दिन हो जाते बदनाम।।
** होशियार सिंह यादव
कनीना, महेंद्रगढ़,हरियाणा

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