जग चक्र
कितने आये कितने ही गये,
जन का चक्र बहुत पुराना है।
कौन किसी को याद करेगा,
पूरे जग ने भी यह माना है।।
सोच समझके काम करो यूं,
जन-जन में नाम कमाना है।
पाप,अहित यहां छोड़ जाना,
धर्म ,कर्म संग ले जाना है।।
*डा. होशियार सिंह यादव
कनीना,महेंद्रगढ़, हरियाणा

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