आंखों की आंखों से बातें
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विधा-कविता
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आंखों की आंखों से बातें,
जब कभी जन कहता है।
मन मंदिर में बस जाता है,
बस प्यार दिलों में रहता है।।
आंखों की आंखों से बातें,
चुपचाप चले ज्यों तीर चले।
कभी तलवार का सामना हो,
कभी दिलों में यूं प्यार पले।।
आंखों की आंखों से बातें,
मुमकिन है कुछ कर पाये।
दिल तो बेचारा खो बैठे हैं,
अब करते रहते हाय-हाये।।
आंखों की आंखों से बातें,
गूढ लगे और होती न्यारी।
समझने वाले समझ जाते,
जो समझे उसे लगे प्यारी।।
आंखों की आंखों से बातें,
कहती है एक मन कहानी।
दो दिल जब मिलते हैं तो,
करने लग जाते मनमानी।।
आंखों की आंखों से बातें,
नहीं कोई मुख कह पाता।
जब किसी वो मोड़ मिले,
तब वो सुनहरा दिन आता।।
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स्वरचित/नितांत मौलिक
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* होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
फोन 09416348400


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