सोने की चिडिय़ां
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विधा-कविता
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चहुं ओर खुशहाली थी, हर घर में दीवाली थी,
स्त्री पुरुष नित हँसते जाये,रातें काली काली थी।
शिक्षा का प्रचार चहुं ओर, विदेशों तक था नाम,
धर्म कर्म में लीन सभी हो, दूध भरी थाली थी।।
विदेशों तक नाम देश का,तक्षशिला और नालंदा,
विदेशी जन पढऩे आये, ऐसा भारत देश महान।
शान और शौकत भरी हुई,हँसते मिलते हैं लोग,
कत्र्तव्यनिष्ठ हाली व पाली,जगत अनोखी शान।।
जयकारे गूंजते निस दिन,तिरंगा ऊंची रखे शान,
बच्चा बच्चा सुसभ्य लगता,कोई नहीं है अज्ञान।
देख देखकर यौवन जन का, माथे आये पसीना,
पेड़ और पौधे यूं लहराते, लगते नहीं हैं अंजान।।
नेता, वेत्ता, हर मुख पर,रामायण और महाभारत,
युवा, बेटियां देश मेरे की, ज्ञान विज्ञान में हैं रत।
श्रवण जैसे सुसंकारी, लगता देश मेरा है महान,
मेरे देश की खुशियों से,नहीं रहा है अब अज्ञान।।
सोने की चिडिय़ां होता था, आज भी हैं प्रमाण,
राम और सीता के उदाहरण, लक्ष्मण होता भाई।
धन-दौलत के भरे खजाने, ऐसा मेरा होता देश,
देख देखकर जन की सुरक्षा, कुछ भी नहीं शेष।
शाम हुई तो चोरी ना डर, खुले पड़े सब दरवाजे,
कहीं भी देखो सुर बजते,बज रहे हैं ढोल व ताशे,
हर इंसान के दिल में रहता,एक बड़ा सा खटका,
देख ले भारत की सुंदरता,उसका ही दिल अटका
पतिव्रता अनगिनत नारी, भरा हुआ है भारत देश,
साधु संतों का लगे अखाड़ा,ज्ञान की बहती गंगा।
हर घर पर नक्काशी कही है,फहरे जहां पे तिरंगा,
चुस्त दुरुस्त हर इंसान,बुजुर्ग भी लगे भला चंगा
सोने की चिडिय़ां था सचमुच, मिलते हैं प्रमाण,
विदेशी ताकत झांक के न देखे,बहुत बड़ा नाम।
हर घर में मंदिर होता, लगता है बड़ा यह धाम,
सुनहरी भोर यहां आती, सुनहरी होती है शाम।।
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स्वरचित/मौलिक
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* डा. होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
फोन 09416348400

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