सांवला रंग
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विधा-कविता
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सांवला रंग मन को लुभाये,
कभी हँसे कभी मुस्कुराये।
श्रीकृष्ण सी बांसुरी अधर पे,
कितनी गोपियों को लुभाये।।
सांवला रंग पक्का होता जन,
सांवले की हो अजब अदायें।
सांवला मोहन हर दिल बसे,
हर जन के मन को भा जाये।।
सांवला रंग जगत में प्रसिद्ध,
कहकर गये कितने ही कवि।
और चमक आ जाती है जब,
चमके दमके नभ पर वो रवि।।
सांवला रंग हर दिल अजीज,
सांवले पर कर लेना विचार।
सांवली मूरत जब भी मिलती,
मन में उभरेगा अनहद प्यार।।
सांवला रंग देव जग रखवाला,
विष्णु और मनमोहन हैं एक।
अटल इरादे हर जन के खातिर,
दूर कर देते जब कष्ट हो अनेक।।
राधा प्रसन्न देखकर मनमोहन,
होती है प्रसन्न मन ही वो मन।
विष्णु के आठवें अवतार वो,
प्यारे लगते जग के जन जन।।
देवकी, वासुदेव के हैं प्रिय,
यशोदा और नंद के हैं प्यारे।
गीता का उपदेश दे दिया वो,
पापी जन को भी पार उतारे।।
सांवला रंग द्योतक जग देव,
नहीं कोई उनसे महान होगा।
जिसने उनकी महिमा सुन ली,
उसने ही स्वर्ग का सुख भोगा।।
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स्वरचित/मौलिक
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* डा. होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
फोन 09416348400

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