कुछ तो है
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विधा-कविता
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कुछ न कुछ होता है, जगत आधार,
दूर से आकर बढ़ जाता है जन प्यार।
बसा हुआ यहां वहां, सुनहरा संसार,
आपसी प्रेम नहीं हो तो जीना बेकार।।
कुछ तो है,जो खिंच लेता है इंसान,
कोई तो बदनाम हो,कोई बने महान।
हर मानव की जग में,होती पहचान,
जीने की अदा हो, अपनी हो शान।।
कुछ तो है अदृश्य शक्ति,देती प्रमाण,
यह जगत भरा है, गुणों की है खान।
आगे बढ़कर देख, बन नहीं अज्ञान,
बुराई का मन कर लेता पूर्व में भान।।
कुछ तो है, जो चलाता सारा संसार,
साधु, संत सब खोज खोजकर हारे,
जप-तप करते देखे कभी दिन रात,
कभी खोज में पहुंचते मंदिर के द्वारे।
कुछ तो है, अदृश्य रूप में दे साथ,
कैसे मौसम बदले, कैसे दिन रात,
कभी बने सुख दुख के ही हालात,
ज्ञान विज्ञान के चर्म की चले बात।
कुछ तो है,जो यादों में आ जाते हैं,
कुछ बेबात ही गले में पड़ जाते हैं,
कुछ तो यादों में सारी रात सताते हैं,
कुछ अनजाने हमें गले से लगाते हैं।
कुछ तो है,जो मातृभूमि पर दे जान,
शहीद होते हैं तो बनती है पहचान,
वीर सपूत देश में कहलाते हैं महान,
देशभक्त देश पर हो जाते हैं कुर्बान।
कुछ तो है, जो प्रेरणा देते हैं इंसान,
कितने ही लोग, दे जाते बड़ा दान,
गुरुजनों के पास बैठ, पाते हैं ज्ञान,
उन्नति करता जाये, देश का विज्ञान।
कुछ तो है,जो मिले मात पिता गुरु,
लंबी कहानी अचानक होती शुरू,
निराशा भी क्षण में बन जाती आशा,
देखा नजारा तो बढ़ जाएगी पिपासा।
कुछ तो है, खिंचा चला जाए मानव,
कब दिमाग बदले, बन जाता दानव,
पल में खुशियां बदल जाती हैं गम,
नहीं पता चलते चलते निकले दम।
कुछ तो है, जो देता अंदरूनी शक्ति,
दुष्ट के दिल में जाएगी कभी भक्ति।
रोते रोते जन शुरू कर देता है हँसना,
ख्वाबों में आते हैं वो सांसों में बसना।
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स्वरचित/मौलिक
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* डा. होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
फोन 09416348400

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