सावन
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विधा-कविता
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रिमझिम रिमझिम बूंदे गिरे,
लग रही सावन की झड़ी,
मनभावन मौसम हो गया,
क्या सुंदर लग रही घड़ी।
नृत्य कर रहे वन में मोर,
दादुर करते संगीतमय शोर,
पपीहा नभ पर शोर मचाये,
कलरव करते पक्षी लुभाये।
सुबह की बेला मन मोहती,
सांझ मन को करती विभोर,
ऐसा सुंदर नजारा मिल रहा,
बादल गरज रहे चहुं ओर।
शिव आराधना का सावन,
जप,तप,व्रत कर रहे भक्त,
सावन की झड़ी लगी रहे,
साधु संत हो रहे हैं विरक्त।।
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स्वरचित/नितांत मौलिक
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* होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
फोन 09416348400
बरसो मेघा
विधा-छंदमुक्त कविता
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उमड़ घुमड़कर आये बादल,
पूरे जगत में छाये ये बादल,
मेघा बरसो यूं जोर लगाकर,
किसान समस्या होती हल।।
चाह रहे हैं तुमको मतवाले,
प्रेमी युगल जन भोलेभाले,
जीवन तुझ से ही बन जाता,
करते हैं यह अब तेरे हवाले।
सावन की ठंडी पड़े फुहार,
बिन साजन है जीवन बेकार,
मघा बरसे धरती हो प्रसन्न,
लो आज खड़े हैं हम तैयार।।
मेघा बरसों पूरे ही सावन,
आएगी चहुं ओर हरियाली,
वो दाता है देख रहा सब,
वो ही होता जग का माली।।
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स्वरचित एवं नितांत मौलिक
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-डा होशियार सिंह यादव
कनीना, जिला-महेंद्रगढ़, हरियाणा
फोन 09416348400


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