बरसते नैन
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विधा-छंदमुक्त कविता
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भीगी भीगी रात हो,
बरस रहे हो नैन,
दिल में एक आहट सुने,
कहीं मिले न चैन।
दूर गगन बरसात हो,
रिमझिम रिमझिम करे शोर,
दिल में एक दर्द पनपे,
वन जंगल में नाचे जब मोर।।
परदेश गये जिनके पीया,
सावन बैरी सताता है,
पीया मिले जब आन के,
दिल में चैन आता है।
सांझ सवेरे आहट हो,
बार बार मन झांके बाहर,
खुशी मिले जब मन को,
दीप जले तब घर घर।
बरसते नैन सदा कह रहे,
सावन सूखा न जाये,
नसीब मिले जिनके खुशी,
वो जन उतना पाय।।
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स्वरचित एवं नितांत मौलिक
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-डा होशियार सिंह यादव
कनीना, जिला-महेंद्रगढ़, हरियाणा
फोन 09416348400


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