मुझे देखने दो
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विधा-कविता
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भारत का इतिहास पुराना,
सबने जाना सबने माना।
मुझे देखने दो क्या-क्या,
लोगों ने इसको पहचाना।।
मुझे देखने दो आगे बढ़के,
कौन दोस्त है कौन बेगाना।
किसे दिल के पास बुलाना,
किसको दिल से दूर भगाना।।
शिक्षा की बयार बह रही है,
नालंदा तक्षशिला नाम पुराना,
मुझे देखने दो, उस वक्त को,
क्या सुंदर हसीन था जमाना।।
भाव विभोर कर दे खुशियां,
गम को यूं ना पास बुलाना।
जब अंबर से बरसता पानी,
दिल बुनता नये ताना बाना।।
मुझे देखने दो नव युग को,
जिसके ठोकर में है जमाना।
खुशियों को अब कैद करो,
दुखों का बीता है मयखाना।।
सुबह शाम अंबर पे नजारा,
मन को लगता सूरज प्यारा।
इंद्रधनुषी रंग उपवन में हैं,
मुझे देखने दो,जग उजारा।।
नभ पर रात्रि चांद लुभाये,
तारे झिलमिल गीत सुनाये।
मुझे देखने दो, सुंदर नजारा,
दिल बाग बाग हो हषाये।।
बारिश हुई है आज सुहानी,
दादुर करते जाये मनमानी।
मुझे देखने दो ,भंवरों को,
टिड्डा गाये गीत जवानी।।
चहुं ओर फसल लहलहाये,
कृषक के वो मन को हर्षाये।
मुझे देखने दो, छवि निराली,
उस भव्यता को दिल बसाये।।
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स्वरचित/मौलिक
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* डा. होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
फोन 09416348400








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