Tuesday, August 02, 2022

 

तोल

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विधा-कविता
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गजब तमाशा देखते, कैसे कैसे लोग,
जिगर,दिमाग को तोलते,कैसा है रोग।
जिगर,दिमाग का संबंध मिलता बड़ा,
कहते हैं जगवाले इसको ही संजोग।।

जब तक दिमाग नहीं चलता कभी,
जिगर में नहीं बैठती जब कोई बात।
दोनों की जोड़ी बेहतर नहीं बनती है,
तब तक बनी रहती है बुरी हालात।।

तराजू के दो पलड़ों में कभी तोलो,
दिमाग और मस्तिष्क दोना बराबर।
दिल को बहुत सताता देखा गया है,
जब दिमाग में बैठ जाता कोई डर।।

विकसित देशों में अब तो चलता,
जिगर, मस्तिष्क का बड़ा व्यापार।
जिसके पास दोनों ही महान मिले,
उसे जहां में मिल जाता बड़ा प्यार।।

आओ स्वस्थ रखे जिगर, दिमाग,
दोनों बिना जीवन है जन अधूरा।
दोनों में अगर समन्वय मिल जाये,
जल्द से जल्द हो सब कुछ पूरा।।
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मौलिक/स्वरचित
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*होशियार सिंह यादव
वार्ड नंबर 1, मोहल्ला मोदीका
कनीना -123027
जिला-महेंद्रगढ़, हरियाणा
09416348400

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