कोमलता
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विधा-कविता
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कोमलता वो गुण जहां,
समक्ष खुश होत इंसान।
सच्चे,साधु जन की यह,
बन जाती बड़ी पहचान।।
कोमलता देख सुकुमार,
भ्रमर आते हैं बड़े पास।
बस एक इस गुण कारण,
बन जाते हैं कितने दास।।
कोमलता सर्वोच्च गुण है,
पत्थर का कर देता मोम।
वाह वाह मुख से निकले,
पुलकित होता रोम रोम।।
कोमलता जिस दिल बसे,
पूर्ण कर लेता जग काम।
बस इक सुंदर गुण से ही,
हो जाता है जगत में नाम।।
कोमलता के नाम पर जन,
लेते नाम जग के ही फूल।
कोमलता को कम आंकना,
जन की होती है बड़ी भूल।।
कोमल होता जब मन जन,
दया, रहम के करता काम।
जिसके दिल में रहम मिले,
वो जाता है बस स्वर्ग धाम।।
कोमल हृदय जब हो नहीं,
पाप,अधर्म के करता काम।
अहित, अत्याचार दिनरात,
हो जाता है जगत बदनाम।।
कभी नहीं मुख मोडऩा है,
कोमलता गुण के सामने।
देवत्व गुण के समान हो,
हर जन लगे इसे जानने।।
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स्वरचित/मौलिक
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* डा. होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
फोन 09416348400

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