अन्तर्राष्ट्रीय शांति दिवस
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विधा- छंदमुक्त कविता
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शांति जग में चाहिए, करना है एक काम,
एकता और भाईचारे का, देना बस पैगाम।
जब जग में हो शांति, पूरा जगत हमारा हो,
बापू के सपनों का ये, भारत देश प्यारा हो।।
पंचशील का सिद्धांत, पूरे जग में फैला दो,
शांति के दूत हैं कबूतर,हवा में अब उड़ा दो।
आपस में जब प्रीत हो, बन जाए जन अपने,
भाईचारे का वो पैगाम, जन जन में फैला दो।।
वर्ष 2002 से ही, शांति का दिवस मनाते हैं,
देते हैं पैगाम जगत को,जन को गले लगाते हैं।
कभी नहीं यह भूलना,सब जन होते हैं अपने,
आओ खुशियां बांट दे,जन को अब हँसाते हैं।।
परस्पर लाभ नीति को, देना होगा यह पैगाम,
आक्रामक नीति भूलकर, करना है जग नाम।
अखंडता का पाठ पढ़ा,ऐसा है जन का काम,
धर्म कर्म के बल पर सदा,बनता तन भी धाम।।
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स्वरचित/नितांत मौलिक
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* होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
फोन 09416348400

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