Friday, October 31, 2025

                             

 खुशियां बांटों
गम तो चलते चलते मिलता,
खुशियां मिलती है अति दूर।
रोते चेहरों को हंसा देंगे गर,
चेहरे पर खिल उठता है नूर।।
चार दिन जीकर जाना जगत,
फिर भूला देंगे स्वार्थी लोग।
धर्म कर्म की राह पकड़ ले,
वरना गम की दुनिया भोग।।
**होशियार,कनीना,हरियाणा

        आदत
ये आदत बन गई कमी निकालना,
बुरे वक्त अपनों को न पहचानना।
कुछ की तो आदत जहान में यारों,
सच बात को सच कभी न मानना।।
दूसरे की उन्नति पर वे रोते फिरते है
पाप अधर्म से वो कभी ना डरते हैं।
उनके लिए तो अल्प ज्ञान सहारा है,
वीर पुरुष इनके श्राप से न मरते हैं।।
***होशियार सिंह यादव,कनीना
महेंद्रगढ़, हरियाणा-123027


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