रंग रोगन
रंग रोगन में लगे हुए हैं, दिवाली
की दस्तक,
साफ सफाई कर लेना,मां को करो नतमस्तक।
दीवाला निकल जाता,फिर भी त्योहार पर गर्व,
आतिशबाजी करते, हिंदुओं का यह महापर्व।।
बाजारों में रौनक बढ़ी है,गंदगी भरी हैं मिठाई,
घर की मिठाई खाना, वरना होगी जन हंसाई।
सोच समझकर खरीददारी कर,वरना पछताना,
लक्ष्मी मां अरदास करूं, मेरे घर में आ जाना।।
**डा. होशियार सिंह यादव,कनीना
जिला-महेंद्रगढ़, हरियाणा
अब तो आ गोपाल
पैर काट चांदी ले गये,वो जघन्य अपराध किया,
ये यहीं देश मेरा है,जहां शिव ने कालकूट पिया।
धन की खातिर जान लेते, पल में हत्या करते हैं,
घोर अपराधों से दुष्ट, लेशमात्र भी नहीं डरते हैं।।
अपने ही अपनों का यूं तों, खून करते देखे जाते,
लाखों पाप करते मिलते, वो जग में नाम कमाते।
अब तो आ गोपाला, मन मंदिर दर्द उठा है आज,
राक्षसों को मार दे दाता, हर जन को होगा नाज।।
***डा. होशियार सिंह यादव,कनीना,महेंद्रगढ़
विश्व रिकार्डधारक, शिक्षा के क्षेत्र में,हरियाणा*

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