बाजरा
वर्षा की मार पड़ी भारी,बाजरा हुआ खराब,
किसान फिरते मारे मारे, किससे कहे जनाब।
मंडी में सस्ता बिकता,कृषक यहां पर पिसता,
सरकारी भाव मिले न,बेचारा जूते ही घिसता।।
आशा सारी धूमिल हुई,मिला नहीं कोई लाभ,
क्या क्या सपने संजोये,धूल में मिले हैं ख्वाब।
हारकर खेत में लगा, सरसों की कर दी तैयारी,
कितनेे ही दर्द जहां दे,खेती फिर भी लगे प्यारी।।
***डा. होशियार सिंह यादव,कनीना*****
विश्व रिकार्डधारक, जिला-महेंद्रगढ़,हरियाणा
छठ पूजा
सूर्य उपासना का पर्व आया,
कर्ण भी उपासक कहलाया।
राजपाट भी वापस मिला था,
श्रीकृष्ण ने द्रोपदी बतलाया।।
धन धान्य से जन परिपूर्ण हो,
खुशियों की आ जाये बारात।
गम खुशियों में बदल जाएंगे,
छठ पूजा व्रत करो दिन रात।।
***डा. होशियार सिंह यादव
कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा****

No comments:
Post a Comment