Thursday, October 16, 2025

 

             धन तेरस
आखिर आया धन तेरस त्योहार,
लाओ बर्तन भर लो अमृतधार।
धन्वंतरि की याद दिलाता दिन,
पर्व लेकर आया अनहद प्यार।।
हर घर से खरीदते हैं नया बर्तन,
चाहत होती है अमृत हर इंसान।
मेहनत करके जो कुछ मिलता,
समझ लो उसको ही अमृतधार।।
***होशियार सिंह यादव,कनीना
महेंद्रगढ़,हरियाणा********
     विश्वास
कर्म फल में विश्वास कर, कुछ तो दाता से डर,
नाम कमा ले जगत में, फिर तो इस धरा पे मर।
पाप कर्मों का फल बुरा, ऐसा करता वो दुष्ट नर,
सब कुछ छोड़के जाना पड़ता,बस दाता के घर।।
शिक्षा देते कितने ही पर, अमल करें वो इंसान,
किसी के हित को भूल गया, कहते उसे अज्ञान।
जन्मों के चक्कर में पड़कर,बन जाता जन अंजान,
कौन है तू, क्या करना तुझको,अब तो पहचान।।


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