Wednesday, October 01, 2025


 

              खुशियां
छीन जाती हैं खुशियां, बस्तों के बोझ तले,
मां बाप छुटकारा पाने को,भेज देते स्कूल।
अबोध जाते वैन में, कैसे हो पाये विकास,
बड़े होने पर समझते, क्या हुई इनकी भूल।।
अनावश्यक पढऩा पड़े, खा लेते कई फांसी,
जितना ज्ञान दिया दाता, उतना आगे बढेगा।
ज्ञान तो प्रकृति की देन, शिक्षा नहीं है दासी,
जिसका मन जिस क्षेत्र में,उसमें आगे बढ़ेगा।।
***होशियार सिंह यादव,कनीना,महेंद्रगढ़
विश्व रिकार्डधारक, हरियाणा********

                रावण
अभिमान में होता अंत,चाहे रावण या हो संत,
दस शीश रावण हो या फिर हो शीश अनन्त।
स्वाभिमान हो हनुमत सा, सफल हो हर बार,
पाप, घृणा छोड़कर, अब आवाज करो बुलंद।।
हिम्मत का हथियार हो, शांत रहो जैसे श्रीराम,
एकाग्र रहना सीखो, लगे की कोई बैठा धाम।
कितने पापी, राक्षस गये,कोई करता नहीं याद,
परहित,देव गुणों से ही जग में पा सकता नाम।।
**डा. होशियार सिंह यादव,कनीना,महेंद्रगढ़
विश्व रिकार्डधारक, हरियाणा******

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