ऐसे लोग
पाड्डी ऊंट चोरी करते थे,अब ईंट पत्थर उठाते हैं,
अवैध कब्जा कर रास्तों पे,ऊंचे मकान बनाते हैं।
मर्दों को घर बुला-बुलाकर,बच्चे पैदा करवाते हैं,
नामर्दों की भांति रह,बस अपनी शान बचाते हैं।।
बिजली पानी चोरी करके, दानी खूब कहाते हैं,
बैनर बोर्ड राह में लगा,नेता संग हाथ मिलाते हैं।
घर में सत्संग भजन करा, गैरों की ईंट चुराते हैं,
अपनी बीवी से दूर रहे, गैरों से आंख लड़ाते हैं।।
***डा. एचएस यादव,विश्व रिकार्डधारक
कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा*************
दीप जलाए
उन निर्धन के घर दीप जलाएं,
रोटी को तरसते जो नन्हें बच्चे।
एक पीस मिठाई खिला देना है,
बच्चे मन के सदा मिलते सच्चे।।
अनाप शनाप रोटी मिले खराब,
मुस्टंडे पीते जहां खड़े हो शराब।
बांट दो गरीबों में भोजन व पानी,
क्यों नशा चढ़ा धन का जनाब।।
***होशियार सिंह यादव,कनीना
महेंद्रगढ़, हरियाणा

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