अभिलाषा
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विधा- दोहा मुक्तक
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अभिलाषा दिल में बसी, करते जमकर काम।
नया दौर यंू कह रहा, होगा जरूर नाम।।
बिना काम इंसान की, इज्जत मिलती धूल,
अपने कर्मों के बल सदा, बना स्वर्ग सा धाम।।
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अभिलाषा हर जन रखे, सोच लिये दिन रात।
अच्छे कर्मों के बल सदा, होती शुभ हालात।।
बिना विचारे जो करे, वो जाता है डूब,
जमकर मेहनत तुम करो, कहते मेरे तात।।
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स्वरचित/नितांत मौलिक
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* होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
फोन 09416348400
ज्येष्ठ का महीना
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विधा- छंदमुक्त कविता
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ज्येष्ठ महीना, बड़ा सताता,
सुबह शाम, पसीना लाता,
पानी पीते, मिले नहीं चैन,
ककड़ी,तरबूज खूब सुहाता।
पानी की मिलती किल्लत,
पक्षी,पशु बन जाती दुर्गत।
नहीं मिले ठंडा कहीं जल,
पीते हैं जन ठंडा शर्बत।
निर्जला एकादशी आती,
जेठ दुपहरी खूब सताती।
भीम एकादशी नाम पड़ा,
मेरी माता हमको बताती।।
आओ करे घर आराम,
नहीं रहा अब है काम।
व्रत करो एकादशी का,
मिल जाएगा मोक्ष धाम।।
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स्वरचित/नितांत मौलिक
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* होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
फोन 09416348400









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