स्वार्थ
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विधा-कविता
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स्वार्थी है दुनिया,स्वार्थी हैं लोग,
स्वार्थ इस जहां में, बना है रोग।
बुराई अहित का, लगाते हैं भोग,
अच्छे जन मिले, होता है संजोग।।
स्वार्थ से दूर रहे, सच्चे हैं इंसान,
परहित में काम से,बनती पहचान।
पाप बुराई जो करे,वो होता अज्ञान,
धर्म कर्म के बल से, बनता महान।।
स्वार्थ सम है धोखा, देखते मौका,
परहित में जीये, जन हो अनोखा।
कर लो भलाई अब, हो जग नाम,
वरना को बुराई, किसने तुम्हें रोका।।
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स्वरचित/मौलिक
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* डा. होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
फोन 09416348400
हसरतें
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विधा-कविता
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हसरतें दिल में हो, बन जाते हैं काम,
जब कोई न भावना,बिगड़े बनते काम।
सुबह गुजर जब जाती, आती है शाम,
अच्छे कर्म के से, तन बनता है धाम।।
हसरतें पालते, पर करते नहीं जो काम,
वे जन आलसी, रोते मिले सुबह शाम।
धर्म कर्म मार्ग बड़ा, चलना पड़े जरूर,
परहित के काम करो, मिट जाए गरूर।।
हसरतें जिंदा रखना, जिंदा रहेगा इंसान,
कर्म नेक करने से ही, बनती है पहचान।
दुख देते गरीब को, उसे भूल जाते लोग,
परहित में जो काम करे, उसके गाते गान।।
हसरतें ताजा रखो, हिम्मत से लोग काम,
धन लालसा से दूर रह, ले लो प्रभु नाम।
जो करते अपनों से जुदा, राक्षस ले मान,
गिरते मिले लोग तो, उनको लेना थाम।।
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स्वरचित/मौलिक
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* डा. होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
फोन 09416348400





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