समझौता जिंदगी से
विधा-कविता
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समझौता जिंदगी से करना पड़ा,
आज देखो फैसला लिया कड़ा।
भरा था पानी से खिंचकर खुद,
टूट पानी बिखर गया अब घड़ा।।
समझौता जिंदगी से करना ठीक,
वरना दुनिया में मांगेंगे जन भीख।
क्या जमाना आज आ गया देखो,
बिना रोये ही जन आती है चीख।।
समझौता जिंदगी से कर लो अब,
बीत गया समय तो नहीं होगा तब।
किसी की जिंदगी क्या ख्वाब देती,
इंसान क्या जाने बस जानेगा रब।।
समझौता जिंदगी से करना आज,
फिर देखो जिंदगी पर करो राज।
जग में जिसने समझौता सीखा है,
दुनिया करती है उन पर ही नाज।।
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स्वरचित/नितांत मौलिक
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*डा होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
फोन 09416348400
विधा-कविता
मजदूरी
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बहुत बुरी हो मजदूरी, नहीं मिले वो मजबूरी,
भूखे बच्चे खाने खातिर, सपने लिये अंगूरी।
देता नहीं कोई जन काम,भटकते सुबह शाम,
बस बैठकर सोचे लेते उस दाता का ही नाम।।
आबादी बढ़ती ही जाये, रोजगार घटता जाये,
बच्चे भूखे तड़प रहे, करते रहते हैं हाय हाय।
पढ़ लिखे भी हैं बेरोजगार, खो गया है प्यार,
अच्छी खासी जिंदगी भी, लगने लगी बेकार।।
रोजगार बढ़ते नहीं, आधुनिकता पड़ती मार,
छोटे मोटे काम नहीं बचे, सोच बढ़ी हजार।
जब उनको रोजगार मिले, आये तन खुशियां,
आज प्रसन्नता घेर रही, कल तक जो दुखियां।।
बना दिये इंसान प्रभु ने, मिलती नहीं है रोटी,
पैदा हो गये जीवन पा, कैसी जिंदगी है खोटी।
आएगा कभी वो वक्त, कल्कि लेेकर अवतार,
हो सकता है खुशी देंगे वो, मिले जहां का प्यार।।
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स्वरचित/नितांत मौलिक
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* होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
फोन 09416348400








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