Saturday, June 18, 2022

                      गंगा तुम बहती रहना
                  विधा-कविता
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भागीरथ तुम्हें लाये धरा पर,
कितने कष्ट जगत उठाये थे।
गंगा मैया तुम बहती रहना,
पापी तुमने कितने हँसाये थे।।

सदियों से उद्धार कर रही,
सदियों तक तुम्हें करना है।
ये जग पाप की गंगा होता,
उनका भी पाप हरना है।।

सगर गये इंतजार तेरा कर,
अंशुमान भी नहीं देख पाये,
देव लोक से जब तुम आई,
अनगिनत लोग तुमने हँसाये।।

तुम जग की माता कहलाती,
हर पापी को तुम गले लगाती।
तेरी महिमा बड़ी अपरमपार,
दुखियों के तुम दर्द मिटाती।।

सदा तुम यूं मां बहती रहना,
देते रहना यूं नया जीवनदान।
तेरी शरण में जो भी आता है,
बन जाता वह पल में महान।।
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स्वरचित/नितांत मौलिक
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डा. होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400


पिता
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स्वर्ग से भी प्यारा होता जग में,
पिता कहलाता उनका ही नाम।
हर कष्ट में सदा खड़े मिलते हैं,
सेवा में मिलता सुबह व शाम।।

हर दर्द में मिलता जिनका साथ,
पकड़ चलाया बचपन जो हाथ,
छोड़ गये जब कभी हुये अनाथ,
दाता के बाद जिनका होता हाथ।

पिता समान कोई नहीं जगत में,
आसमान से ऊंचा होता है नाम,
हर मुश्किल को आसान करे जो,
सरल,सुलभ स्वभाव से हो काम।

माता स्नेह,प्यार की होती भंडार,
आशीर्वाद मिले नहीं होती हार,
पिता होते हैं सहारा हर परिवार,
बच्चों को देते रहते प्यार दुलार।

पिता स्वर्ग सा कराते अहसास,
हर आपदा का कर देते हैं नाश,
पिता संग नहीं लगे भूख प्यास,
आता याद हर पल -हर सांस।

हाथ पकड़कर जब वो चलाये,
खुद रोये हर पल हमको हँसाये,
आशीर्वाद कभी पा लेना उनका,
आशीर्वाद हर विपत्ति से बचाये।
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मौलिक एवं अप्रकाशित





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 डा. होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400

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