Sunday, June 19, 2022

 

 लघु कथा
 मुबारक हो
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मुबारक हो रिश्तेदार, मुबारक हो।
एक टक मन ही मन सोचा कि कोई अवार्ड मिल गया होगा जिसकी सूचना मुझे न मिलकर इस मुख्याध्यापक को होगी। एक बार तो मन प्रसन्न हुआ और फिर अनेकों प्रश्र जहन में कौंधने लगे।
......पर मुख्याध्यापक साहब, किस बात की मुबारकवाद दे रहे हो?
रिश्तेदार हम तो अपने रिश्तेदारों का पूरा ख्याल रखते हैं इसलिए आपको सबसे पहले सूचना दे रहा हूं कि आपकी तैनाती मतगणना/काउंटिग में लग गई है और देखना आपके व्हाट्सअप पर मैंने सबसे पहले आपकी तैनाती डाल दी है। देख लेना।
पैरों के नीचे की जमीन खिसक गई कि रिश्तेदार ने मेरे लिए कितना बड़ा काम कर दिया उस पर मुबारकवाद भी दे रहे हैं। वाह क्या कमाल के मुख्याध्यापक हैं।
....परंतु आपकी भी तो तैनाती पीठासीन अधिकारी की लगी थी उसका क्या हुआ?
मुख्याध्यापक: वो तो मैंने कटवा दी है?
.....अच्छा तो इसी बात की खुशी इतनी मिल गई कि तुम्हारे उर में नहीं समा पाई और खुद की तैनाती कटवा दूसरों की तैनाती देखकर उन्हें मुबारकवाद दे रहे हो।
मान गये रिश्तेदार? वास्तव में रिश्तेदार हो तो सचमुच आप जैसा। शुक्रिया कि आपको मेरी तैनाती लगने पर इतनी खुशी मिली। धन्यवाद जी, मुख्याध्यापक, जी।
मन ही मन में मै सोचते हुए आगे बढ़ गया कि क्या जमाना आ गया है कि दूसरों को तैनाती देते देख प्रसन्नता और खुद की तैनाती कटवा लेना। सच ही कहा है कि जमाना स्वार्थी हो गया।
-डा होशियार सिंह यादव, कनीना, महेंद्रगढ़, हरियाणा




 शरारत
विधा- कहानी   











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बात होली के पर्व की है। स्कूल में विद्यार्थी होली के दिन पहुंचे क्योंकि स्कूल की दुलेंडी के दिन होती है। होली पर्व पर दुल्हेंडडी खेलने का का रिवाज चला आ रहा है। रानी के स्कूल में जमकर होली खेली। विद्यार्थी होली के पर्व में सब कुछ भूल गए और जल्दी जल्दी अपनी बस में बैठकर घर के लिए रवाना हो गए। स्कूल की बस प्रत्येक गांव जा रही थी ज्यों ही रानी के गांव के पास बस रुकी बस के बाहर दो शरारती युवक रंग गुलाल लिए हुए खड़े थे। ज्यों ही रानी ने उतरना चाहा तो दोनों शरारती युवकों ने रानी पर रंग एवं गुलाल फेंक दिया। रंग गुलाल को देखकर वह भागने लगी तथा बचने का प्रयास किया तो स्पीड से आ रहे एक वाहन ने उन्हें टक्कर जड़ दी। रानी सड़क पर गिर गई। सिर से खून बहने लगा तुरंत अस्पताल पहुंचाया। डाक्टरों ने करीब के बाद 3 घंटे तक उसे बचाने का प्रयास किया अंतत: उन्होंने दम तोड़ दिया। परिवार में वो दो भाई बहन थे। थी उसके पिता और माता का देहांत हो गया था। उसका एक छोटा भाई रामू अपनी बहन की पढ़ाई का इंतजार कर रहा था कि कब वह नौकरी लगेगी उसे खाने पीने का सामान अच्छी प्रकार मिला करेगा लेकिन इन दो युवकों की शरारत के कारण रानी की जान चली गई। जब राम ने अपनी बहन का शव देखा तो फूट फूट कर रोया, इतने आंसू बहाए कि आसमान भी रोने लगा। वो शरारती दोनों युवक आज कोई शर्मिंदगी नहीं महसूस कर रहे थे। एक बच्ची की जान लेकर भी वे गांव में इधर-उधर घूम रहे थे। लोग कह रहे थे कि इस प्रकार का पर्व हर वर्ष कई जान ले लेता है। कम से कम इस प्रकार की शरारत नहीं करनी चाहिए नहीं तो भविष्य में भी अनेकों जान जाती रहेगी। आज गांव में सन्नाटा था। रानी की मौत एक पर्व के खुशी के अवसर पर हो गई। राम बिलख बिलख कर रो रहा था।
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नितांत मौलिक एवं स्वरचित
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 * डा होशियार सिंह यादव
वार्ड नंबर 11, मोहल्ला मोदीका
कनीना-123027
जिला महेंद्रगढ़, हरियाणा
फोन 9416348400


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